खरगोन में मां के इलाज के खर्च पर छोटे भाई ने बड़े भाई की हत्या, 11 साल की बेटी ने उजागर किया राज
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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के शकरखेड़ी गांव में एक दुखद घटना सामने आई, जहाँ कैंसर से जूझ रही माँ के इलाज के खर्च को लेकर छोटे भाई ने बड़े भाई की हत्या कर दी और शव को घर के ही एक कमरे में दफनाया। 11 साल की बेटी ने साहस दिखाते हुए सरपंच को सच बताया, जिससे मामला उजागर हुआ।
घटना की पृष्ठभूमि
34 वर्षीय पूनम बारे और उसके 38 वर्षीय बड़े भाई संतोष बारे दोनों ही कैंसर पीड़ित माँ के इलाज के खर्च को लेकर लंबे समय से विवाद में थे। माँ को पारिवारिक पेंशन मिलती थी, पर पूनम इलाज पर खर्च करने का विरोध करता था और संतोष को जिम्मेदार ठहराता रहा।
हत्या का क्रम
5 नवंबर को घर में पूनम, संतोष, उनकी माँ और संतोष के दो बच्चे मौजूद थे। पूनम की पत्नी और बच्चे मायके गए हुए थे। माँ के इलाज के खर्च को लेकर फिर से विवाद होने पर पूनम ने लकड़ी के डंडे से संतोष के सिर और पैरों पर हमला किया। गंभीर रूप से घायल संतोष को कमरे में बंद कर दिया गया और परिवार को किसी को बताने पर पुलिस कार्रवाई और घर‑जायदाद जब्त करने की धमकी दी गई।
शिवानी की हिम्मत
संतोष की 11 साल की बेटी शिवानी ने पिता को घायल देख कर दादी की मदद से दर्द की दवा दी, पर मोबाइल रिचार्ज न होने के कारण एम्बुलेंस बुला नहीं सकी। अगले दिन संतोष की मृत्यु हो गई। दो दिनों तक परिवार डर के कारण चुप रहा, पर 7 नवंबर को शिवानी ने गांव के सरपंच के पास जाकर पूरी घटना बताई। सरपंच ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
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पुलिस की कार्रवाई
पुलिस मौके पर पहुंची, कमरे की खुदाई कर संतोष का शव बरामद किया और पूनम बारे को गिरफ्तार कर लिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। वर्तमान में पुलिस पूरी जांच जारी रखी हुई है।
मुख्य बातें
- खरगोन के शकरखेड़ी गांव में कैंसर पीड़ित माँ के इलाज के खर्च को लेकर भाई‑भाई के बीच विवाद हुआ।
- 34 वर्षीय पूनम बारे ने लकड़ी के डंडे से 38 वर्षीय बड़े भाई संतोष को मारकर हत्या कर दी।
- हत्या के बाद पूनम ने घर के एक कमरे में गड्ढा खोदकर शव को दफनाया।
- संतोष की 11 साल की बेटी शिवानी ने सरपंच को सच बताया, जिससे पुलिस को सूचना मिली।
- पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और शव बरामद कर परिजनों को सौंपा।
यह घटना न केवल भाई‑भाई के रिश्ते को बर्बाद करती है, बल्कि एक मासूम बच्ची को भी अपने पिता से वंचित कर देती है। सामाजिक स्तर पर इस प्रकार के पारिवारिक विवादों को रोकने के लिए आर्थिक सहायता और स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता पर पुनः विचार करने की जरूरत है।




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