केसी त्यागी ने कहा: कांग्रेस ने नीतीश कुमार को संयोजक बनाने से इनकार किया, बंटवारा नापसंद
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केसी त्यागी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कांग्रेस के भीतर सत्ता बंटवारे के प्रति असहजता और नीतीश कुमार को गठबंधन का संयोजक बनाने से इनकार करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि INDIA गठबंधन के सभी कामकाज कांग्रेस के कार्यालय से ही संचालित हो रहे हैं, जिससे कई गैर‑कांग्रेसी दलों में असंतोष बढ़ रहा है।
कांग्रेस‑नीतीश कुमार संबंध में प्रमुख बिंदु
केसी त्यागी ने बताया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि JDU के नेता नीतीश कुमार को UPA से अलग नहीं होना चाहिए। उसी बैठक में सोनिया गांधी ने नीतीश कुमार को टोकते हुए कहा, “अच्छा ही हुआ वह चले गए”। त्यागी ने इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस ने नीतीश कुमार को अपमानित किया और उन्हें नेतृत्व की भूमिका नहीं दी।
संयोजक पद पर असहमति
त्यागी के अनुसार, कांग्रेस ने नीतीश कुमार को गठबंधन का संयोजक बनाने के प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस संयोजक तक को राजी नहीं हुई” और इस कारण नीतीश कुमार ने निराशा के साथ अपने आप ही एक बैठक बुलाई।
INDIA गठबंधन का संचालन
केसी ने कहा कि “INDIA गठबंधन के सभी कामकाज कांग्रेस ऑफिस से चलाए जा रहे हैं”। इस बात से अखिलेश यादव भी असहज हैं, हालांकि वह गठबंधन का हिस्सा हैं और साथ ही “PDA” अभियान भी चला रहे हैं। त्यागी ने चेतावनी दी कि यदि ये दल कांग्रेस के एजेंडे के साथ पूरी तरह जुड़ जाएंगे तो उनका भी वही भाग्य हो सकता है जो ममता बनर्जी और अन्य नेताओं का रहा।
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विपक्षी दलों के भीतर नेतृत्व संघर्ष
त्यागी ने बताया कि दक्षिण में DMK का उदय पेरियार के आंदोलन से हुआ, लेकिन वंशवादी राजनीति और भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रभाव से उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता कम होती गई। इसी तरह, पश्चिम बंगाल और केरल में CPI(M) जैसी क्षेत्रीय पार्टियों ने सामाजिक मुद्दों को उठाकर सफलता पाई, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में इन मुद्दों की अनदेखी हुई।
जुड़ाव और अलगाव की कहानी
केसी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस का समर्थन किया लेकिन कभी उसका हिस्सा नहीं बने, और लालू यादव ने भी कांग्रेस के साथ गठबंधन किया लेकिन बाद में अलग हो गए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडीस ने BJP के साथ गठबंधन किया, जिससे जनता दल टूट गया।
मुख्य बातें
- केसी त्यागी ने कहा कि कांग्रेस ने नीतीश कुमार को गठबंधन का संयोजक बनाने से इनकार किया।
- INDIA गठबंधन के सभी कामकाज कांग्रेस ऑफिस से चल रहे हैं, जिससे गैर‑कांग्रेसी दलों में असहजता है।
- नीतीश कुमार ने कांग्रेस के अस्वीकृति के बाद खुद एक बैठक बुलाई, लेकिन अगले छह महीने तक विपक्ष की कोई बैठक नहीं हुई।
- क्षेत्रीय पार्टियों की वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर होने से कांग्रेस के शासनकाल में कई मुद्दों की अनदेखी हुई।
- अखिलेश यादव “PDA” अभियान चलाते हुए भी गठबंधन का हिस्सा हैं, पर कांग्रेस के एजेंडे से असहज हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
केसी त्यागी ने संकेत दिया कि यदि कांग्रेस सत्ता बंटवारे को स्वीकार नहीं करती और गैर‑कांग्रेसी दलों को नेतृत्व की भूमिका नहीं देती, तो गठबंधन की स्थिरता पर प्रश्न उठेंगे। उन्होंने BJP की तुलना में कांग्रेस की रणनीति की आलोचना की, जहाँ BJP ने जॉर्ज फर्नांडीस को एनडीए का संयोजक बनाया, जबकि कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया।
इन बयानों के बाद यह देखना बाकी है कि कांग्रेस अपने गठबंधन रणनीति में बदलाव करेगी या नहीं, और नीतीश कुमार तथा अन्य विपक्षी नेताओं का भविष्य क्या होगा।




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