कालका-शिमला हेरिटेज लाइन पर हाइड्रोजन टॉय ट्रेन का प्रोजेक्ट
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भारत की सबसे खूबसूरत पहाड़ी रेल लाइनों में से एक, कालका‑शिमला हेरिटेज रेलवे, जल्द ही हाइड्रोजन‑फ्यूल‑सेल टॉय ट्रेन से सुसज्जित हो सकती है। रेलवे ने रूट का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और रोग (बरोग) स्टेशन पर हाइड्रोजन प्लांट के लिए स्थान तय किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पुरानी हेरिटेज लाइनों को स्वच्छ ऊर्जा से चलाने की दिशा में कदम बढ़ाना है।
परियोजना की पृष्ठभूमि
कालका‑शिमला रेलवे 1898‑1903 के बीच ब्रिटिश काल में निर्मित 96 किमी लंबी लाइन है, जिसमें 103 सुरंगें और 900 से अधिक पुल शामिल हैं। इस मार्ग को 2008 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता मिली थी। 2023 में केंद्र सरकार ने 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की घोषणा की, जिसमें इस हेरिटेज रूट को भी शामिल किया गया। बाद में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर इस परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।
तकनीकी और पर्यावरणीय पहलू
हाइड्रोजन ट्रेनें डीजल locomotives की तुलना में फ्यूल‑सेल तकनीक से बिजली उत्पन्न करती हैं, जिसका मुख्य उप‑उत्पाद पानी होता है। इस कारण प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, 120 साल पुरानी लाइन पर हाइड्रोजन तकनीक लागू करने के लिए विशेष इंजीनियरिंग समाधान आवश्यक हैं, विशेषकर पहाड़ी ढलानों, सुरंगों और पुलों की संरचनात्मक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए।
प्रक्रिया और अनुमोदन
रेलवे ने रूट सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और रोग स्टेशन पर हाइड्रोजन प्लांट के लिए स्थल चयनित किया गया है। अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय की मंजूरी, तकनीकी व्यवहार्यता (टेक्निकल फिजिबिलिटी) और आवश्यक प्रक्रियाओं की पूर्ति आवश्यक है। इन चरणों के सफल पूर्ण होने पर टॉय ट्रेन का परिचालन शुरू हो सकता है।
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मुख्य बातें
- कालका‑शिमला रेलवे 120 साल पुरानी, 96 किमी लंबी, 103 सुरंगें और 900+ पुलों वाली हेरिटेज लाइन है।
- केंद्र सरकार के ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ कार्यक्रम के तहत इस रूट पर हाइड्रोजन टॉय ट्रेन चलाने की योजना।
- 2023 में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की राष्ट्रीय घोषणा, जिसमें कालका‑शिमला रूट शामिल।
- रूट सर्वेक्षण पूरा, रोग (बरोग) स्टेशन पर हाइड्रोजन प्लांट के लिए स्थल तय।
- हाइड्रोजन फ्यूल‑सेल तकनीक से शून्य उत्सर्जन, मुख्य उप‑उत्पाद पानी, पर्यावरण‑मित्र।
- परियोजना की आगे की प्रगति मंत्रालय की मंजूरी और तकनीकी फिजिबिलिटी पर निर्भर।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो यह न केवल हिमाचल प्रदेश की पर्यटन आकर्षण को बढ़ाएगी, बल्कि भारत में हाइड्रोजन‑आधारित स्वच्छ रेल परिवहन के लिए एक मॉडल भी स्थापित करेगी।




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