जेएनयू में ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सल’ के नारे: एबीवीपी ने जताई तीखी आपत्ति
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की दीवारों पर ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सल’ जैसे नारे लिखे जाने के बाद परिसर में राजनीतिक माहौल फिर से गरम हो गया। इस घटना पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने वामपंथी छात्र संगठनों और जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं और राष्ट्रीय नायकों के सम्मान की रक्षा की मांग की।
एबीवीपी का मुख्य आरोप
एबीवीपी जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि विचारों की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि किसी भी विचारधारा को राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक व्यवहार करने की छूट मिले। उन्होंने यह भी कहा कि ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सल’ जैसे नारे विश्वविद्यालय में स्वस्थ लोकतांत्रिक बहस के बजाय उकसावे और टकराव को बढ़ावा दे रहे हैं।
नेहा बोरा और AISA का उल्लेख
एबीवीपी ने आरोप लगाया कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा विभिन्न मंचों पर उमर खालिद के समर्थन में दिए गए बयानों और नारों से प्रेरणा लेकर उनके कार्यकर्ताओं ने जेएनयू की दीवारों पर ये नारे लिखे। संगठन का कहना है कि यह कृत्य वास्तविक मुद्दों से छात्रों का ध्यान भटकाकर विवादित व्यक्तियों को राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बना रहा है।
उमर खालिद और नक्सलियों के संदर्भ में तथ्य
एबीवीपी के अनुसार, उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में अभी भी न्यायिक हिरासत में है। उन्होंने कहा कि ऐसे विवादित चेहरों को शैक्षणिक संस्थानों में प्रदर्शन का साधन बनाना न केवल शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध भी है।
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वीर सावरकर के चित्र पर आपत्तिजनक लेखन
एबीवीपी ने यह भी उजागर किया कि जेएनयू परिसर में वीर सावरकर जैसे राष्ट्रीय नायक के चित्र के साथ आपत्तिजनक लेखन किया गया है। यह कार्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नायकों के अपमान के रूप में देखा गया। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाए।
मुख्य बातें
- जेएनयू की दीवारों पर ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सल’ के नारे लिखे गए।
- एबीवीपी ने वामपंथी संगठनों और जेएनयूएसयू पर तीखा हमला किया।
- एबीवीपी का आरोप है कि AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने इन नारों को प्रेरित किया।
- उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में अभी भी हिरासत में है।
- वीर सावरकर के चित्र पर आपत्तिजनक लेखन किया गया, जिसे एबीवीपी ने राष्ट्रीय नायकों के अपमान के रूप में बताया।
- एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जिम्मेदारों की पहचान और शैक्षणिक माहौल की रक्षा के लिए कार्रवाई की मांग की।
एबीवीपी की आगे की मांगें
एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी एक विचारधारा की जागीर नहीं है। असहमति का अधिकार सभी को है, पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, राष्ट्रीय नायकों का अपमान करना और उग्र राजनीतिक नारों के माध्यम से तनाव पैदा करना छात्रहित में नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध किया कि ऐसी घटनाओं को संज्ञान में लेकर तुरंत जांच शुरू की जाए और जिम्मेदारों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
परिणाम और संभावित प्रभाव
यह विवाद जेएनयू में विचारों की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की सीमाएँ और शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों की सीमा को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दे सकता है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन उचित कदम नहीं उठाता, तो छात्र समूहों के बीच तनाव बढ़ सकता है और शैक्षणिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।




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