इज़राइल के 27 अक्टूबर के चुनाव: नेतन्याहू, ट्रम्प और ईरान युद्ध का जटिल समीकरण
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इज़राइल में 27 अक्टूबर को होने वाला संसदीय चुनाव देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह चुनाव केवल बेंजामिन नेतन्याहू की जीत‑हार नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया के कई समीकरणों को भी प्रभावित करेगा, जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति की साख दांव पर है।
नेतन्याहू की सत्ता‑संकट
बेंजामिन नेतन्याहू इज़राइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं; अलग‑अलग कार्यकालों को मिलाकर उन्होंने 17 वर्ष से अधिक सेवा की है। इस चुनाव में उनका राजनीतिक अस्तित्व सीधे जुड़ा हुआ है, क्योंकि उनका निरंतर नेतृत्व इज़राइल की सुरक्षा और विदेश नीति के प्रमुख बिंदु रहे हैं। चुनावी रैली में नेतन्याहू ने मतदाताओं से कहा कि “बाहर निकलो, घर पर मत रहो” और जीत की पुष्टि न होने तक “हाथ से निकली भी नहीं है”। उन्होंने ईरान के खिलाफ जीत का वादा किया और कहा कि जीत के बाद इज़राइल को “विनाश का खतरा” हमेशा के लिए हट जाएगा।
ट्रम्प की विदेश नीति में इज़राइल का महत्व
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इज़राइल के चुनाव में विशेष रुचि जताई है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू को “99% समर्थन” मिलने का दावा किया और कहा कि “इज़राइल में ऐसी सरकार होनी चाहिए जो हमारी विदेश नीति को आगे बढ़ाए”। ट्रम्प का मानना है कि इज़राइल की स्थिर सरकार सऊदी अरब जैसे बड़े मुस्लिम देशों को अमेरिकी रणनीति में शामिल करने में मदद करेगी। इस प्रकार इज़राइल का चुनाव केवल एक पड़ोसी देश का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति, क्षेत्रीय स्थिरता और ट्रम्प की व्यक्तिगत विदेश नीति की सफलता से जुड़ा हुआ है।
विपक्षी की चेतावनी और आंतरिक तनाव
विपक्षी याशर पार्टी के नेता गादी आइज़ेनकोट ने कहा कि नेतन्याहू “इज़राइल को अपने नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में फंसाना चाहते हैं” और उन्होंने नेतन्याहू को “घर जाना ही होगा” का इशारा किया। साथ ही, इज़राइल के आर्मी चीफ एयाल जमीर ने कहा कि चुनाव से पहले ईरान पर हमले का आदेश देना आवश्यक नहीं है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या नेतन्याहू युद्ध का माहौल बनाकर वोट बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।
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ईरान का दृष्टिकोण
ईरानी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि इज़राइल में चल रहे चुनाव “वास्तव में अलग‑अलग गिरोहों के बीच इस बात की होड़ है कि कौन ज्यादा बुराई कर सकता है” और उन्होंने कहा कि “हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन जीतता है”। यह बयान इज़राइल के चुनाव को ईरान के लिए रणनीतिक महत्व नहीं देने का संकेत देता है।
संभावित परिणाम और जोखिम
यदि नेतन्याहू चुनाव हारते हैं, तो उनके खिलाफ कई कानूनी केस चलने की संभावना है, जिसमें जेल की सजा भी शामिल हो सकती है। साथ ही, अमेरिकी गाजा योजना और कई बिलियन डॉलर के निवेश को भी संकट का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि नेतन्याहू जीतते हैं, तो इज़राइल के आईडीएफ चीफ एयाल जमीर के ईरान पर हमले के आदेश को लिखित मंजूरी देने के सवाल अभी भी बना रहेगा।
मुख्य बातें
- 27 अक्टूबर को इज़राइल में संसदीय चुनाव होगा, जो पश्चिम एशिया के कई समीकरणों को प्रभावित करेगा।
- बेंजामिन नेतन्याहू ने 17 वर्ष से अधिक प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की है; यह चुनाव उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए अहम है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नेतन्याहू को समर्थन दिया और इज़राइल की स्थिर सरकार को अपनी विदेश नीति के लिए आवश्यक बताया।
- विपक्षी गादी आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू को “घर जाना” का इशारा किया, जबकि आईडीएफ चीफ ने चुनाव से पहले ईरान पर हमले की आवश्यकता पर सवाल उठाया।
- ईरान के प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव का परिणाम उनके लिए मायने नहीं रखता।
- नेतन्याहू की हार से कानूनी केस और अमेरिकी निवेश पर असर पड़ सकता है; जीत से ईरान‑इज़राइल तनाव के नए मोड़ की संभावना है।
इज़राइल का यह चुनाव न केवल देश के भविष्य को तय करेगा, बल्कि अमेरिकी‑इज़राइल संबंध, ईरान के साथ तनाव और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर भी गहरा असर डालेगा। सभी पक्षों के लिए यह एक निर्णायक मोड़ है, जहाँ परिणाम के आधार पर क्षेत्रीय राजनीति में नई दिशा बन सकती है।




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