इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट के सख्त आदेश: हर वार्ड में दो स्वयंसेवक, थानों को मापक उपकरण
3 मिनट में पढ़ें

इंदौर में ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती समस्या को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को कठोर आदेश जारी किए। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने पुलिस, नगर निगम और संबंधित प्राधिकरणों को शोर नियंत्रण के लिए विस्तृत निर्देश दिए, जिससे शहर में शांति और सुकून बहाल हो सके।
हाईकोर्ट के मुख्य आदेश
कोर्ट ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:
- हर पुलिस थाने को ध्वनि मापक उपकरण उपलब्ध कराना और उनके संपर्क नंबर को समाचार पत्रों व इंदौर पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करना।
- प्रत्येक वार्ड से दो स्वयंसेवक नियुक्त करना, जो शोर फैलाने वाले व्यक्तियों व वाहनों की जानकारी पुलिस को देंगे और मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करेंगे।
- साइलेंस जोन की सूची को केवल अंश नहीं, बल्कि व्यापक प्रसार वाले दैनिक समाचार पत्रों में विधिवत प्रकाशित करना।
- नगर निगम के कचरा संग्रहण वाहनों पर बजने वाले स्वच्छता गीतों की आवाज़ को निर्धारित डेसीबल सीमा के भीतर लाना या कम से कम 25 प्रतिशत तक घटाना।
- प्रत्येक थाने को ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायतों का रिकॉर्ड अदालत में पेश करना।
ध्वनि मापक उपकरणों की व्यवस्था
हाईकोर्ट ने बताया कि ध्वनि मापन के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं, परन्तु उनका सार्वजनिक स्थानों पर उपयोग नहीं हो रहा था। अब प्रत्येक थाने को ये उपकरण प्रदान किए जाएंगे, जिससे शोर के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी। थानों के संपर्क नंबर भी नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
स्वयंसेवकों की भूमिका
कोर्ट ने प्रत्येक वार्ड से दो स्वयंसेवकों को नियुक्त करने का निर्देश दिया। ये स्वयंसेवक शोर उत्पन्न करने वाले स्रोतों की पहचान, फोटो/वीडियो रिकॉर्डिंग और पुलिस को त्वरित सूचना प्रदान करने में मदद करेंगे। इस पहल से स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी और शोर नियंत्रण में पारदर्शिता आएगी।
आपके लिए संबंधित खबरें
नगर निगम के लिए विशेष निर्देश
नवरात्रि और दशहरे जैसे बड़े उत्सवों के दौरान शोर स्तर में अत्यधिक वृद्धि देखी गई थी। इस संदर्भ में नगर निगम को कचरा संग्रहण वाहनों पर बजने वाले स्वच्छता गीतों की आवाज़ को नियत सीमा के भीतर लाने या कम से कम 25 प्रतिशत तक घटाने का आदेश दिया गया। तीन सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने की भी मांग की गई।
आगे की कार्यवाही
हाईकोर्ट ने अगले सुनवाई की तिथि 23 नवंबर 2026 के बाद के सप्ताह में निर्धारित की है। इस दौरान सभी विभागों को अपने-अपने अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
मुख्य बातें
- हर पुलिस थाने को ध्वनि मापक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
- प्रत्येक वार्ड से दो स्वयंसेवक नियुक्त किए जाएंगे।
- साइलेंस जोन की सूची को व्यापक दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित करना अनिवार्य।
- नगर निगम के कचरा संग्रहण वाहनों की आवाज़ को 25% तक घटाना होगा।
- तीन सप्ताह में सभी विभागों को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
इन सख्त निर्देशों के माध्यम से इंदौर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और नागरिकों को शांति प्रदान करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।




टिप्पणियाँ
0