कप्तानियों से मुक्त, हरमनप्रीत कौर ने 15 महीनों बाद जड़ा शतक और रिकॉर्ड तोड़े
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर ने हाल ही में कप्तानी से हाथ धोने के बाद अपनी बल्लेबाजी में जबरदस्त वापसी की। वडोदरा में 25 अक्टूबर को ज़िम्बाब्वे महिला टीम के खिलाफ वनडे सीरीज के दूसरे मैच में उन्होंने 126 रन बनाकर शतक जड़ा, जिससे उनके करियर में आठवां शतक जुड़ गया और भारत की महिला टीम में शतक के क्रम में दूसरा स्थान हासिल किया।
कप्तानी से इस्तीफा और उसका प्रभाव
हरमनप्रीत कौर ने भारतीय टीम की कप्तानी से इस्तीफा दिया था, जिसे मुख्यतः उनकी फॉर्म में गिरावट और बढ़ते दबाव के कारण माना गया। कप्तानी छोड़ते ही उनका बल्ला फिर से बोलने लगा, जैसा कि इस सीरीज में स्पष्ट रूप से दिखा। पहले टी20 सीरीज में जिम्बाब्वे के खिलाफ 91 रन की धुआंधार पारी के बाद, वनडे में उनका प्रदर्शन और भी शानदार रहा।
वडोदरा में शतक की कहानी
वडोदरा में रविवार, 25 अक्टूबर को खेले गए वनडे के दूसरे मैच में भारत ने शुरुआती ओवरों में ही 19 रन पर दो विकेट खो दिए, जिसमें कप्तान स्मृति मंधाना भी शामिल थीं। इस संकट के बाद हरमनप्रीत को टीम को संभालने की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने प्रतिका रावल और दीप्ति शर्मा के साथ मिलकर शतकीय साझेदारी बनाई, जिससे भारत का स्कोर धीरे‑धीरे बढ़ा।
हरमनप्रीत ने 101 गेंदों में 101 रन बनाकर शतक पूरा किया, जिसमें 12 चौके शामिल थे। अंत में उन्होंने 121 गेंदों में 126 रन (15 चौके) बनाकर आउट हुईं। यह शतक 15 महीनों के लंबे इंतजार के बाद आया, क्योंकि उनका पिछला वनडे शतक जुलाई 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ था।
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रिकॉर्ड और रैंकिंग
यह शतक हरमनप्रीत के वनडे अंतरराष्ट्रीय करियर का आठवां शतक है। इस उपलब्धि से वह भारत की महिला टीम में वनडे शतक के क्रम में दूसरे स्थान पर पहुंच गईं, जिससे पूर्व कप्तान मिताली राज (7 शतक) को पीछे छोड़ दिया। अब केवल नई कप्तान स्मृति मंधाना (14 शतक) ही उनसे आगे हैं।
मुख्य बातें
- हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी छोड़ते ही 126 रन बनाकर शतक जड़ा।
- शतक 101वें गेंद पर पूरा हुआ, जिसमें 12 चौके शामिल थे।
- यह उनका 8वां वनडे शतक और 15 महीनों के बाद आया पहला शतक है।
- वह भारत की महिला टीम में शतक के क्रम में दूसरे नंबर पर पहुंच गईं, मिताली राज को पीछे छोड़ते हुए।
- शतक के साथ ही उन्होंने प्रतिका रावल और दीप्ति शर्मा के साथ शतकीय साझेदारी बनाई।
आगे की संभावनाएँ
कप्तानी से मुक्त होकर हरमनप्रीत ने दिखा दिया कि दबाव में भी वह टीम को स्थिरता प्रदान कर सकती हैं। उनकी इस वापसी से भारतीय महिला टीम को मध्य क्रम में भरोसेमंद विकल्प मिल गया है, जो आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




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