ग्रेटर नोएडा के बिसरख में दशहरा: रावण की पूजा, दहन नहीं
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दशहरा के दिन जब देशभर में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, तब ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में एक अलग ही परंपरा चलती है। यहाँ रावण का दहन नहीं, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार बिसरख ही रावण की जन्मस्थली है, इसलिए गांव के लोग उसे अपने पूर्वज के रूप में सम्मान देते हैं। इस वर्ष प्राचीन शिव मंदिर में रावण की नई प्रतिमा स्थापित की गई और दशहरा के अवसर पर विशेष हवन, पूजा और आरती का आयोजन किया जाएगा।
बिसरख में रावण की पूजा का इतिहास
बिसरख गांव ऊँची इमारतों और आधुनिक सोसाइटियों के बीच स्थित है, पर इसकी पहचान सदियों पुरानी धार्मिक मान्यता से जुड़ी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि रावण और उनके पिता ऋषि विश्रवा ने इस स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की थी। इस कारण ही बिसरख के प्राचीन शिव मंदिर को धार्मिक महत्व प्राप्त है। गांव के महंत के अनुसार, रावण की पूजा की परंपरा बहुत पुरानी है और इसे कई पीढ़ियों से निभाया जा रहा है।
प्राचीन शिव मंदिर में स्थापित नई प्रतिमा
पहले इस मंदिर में रावण की कोई प्रतिमा नहीं थी। इस वर्ष मंदिर परिसर में उसकी भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा को फूलों से सजाया गया और विशेष हवन के साथ आरती का आयोजन किया जाएगा। महंत ने बताया कि मंदिर में नियमित रूप से सुबह और शाम आरती होती है, और दशहरा के दिन इस कार्यक्रम में अतिरिक्त धार्मिक अनुष्ठान जोड़े जाएंगे।
दशहरा के दिन विशेष कार्यक्रम
दशहरा के अवसर पर बिसरख के शिव मंदिर में निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे:
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- रावण की प्रतिमा के सामने विशेष हवन
- फूलों से सजी प्रतिमा पर आरती
- भक्तों के लिए भगवान शिव का दर्शन
- स्थानीय महंत द्वारा धार्मिक प्रवचन
इन कार्यक्रमों में गांव के निवासी और बाहर से आए श्रद्धालु भाग लेंगे। कई श्रद्धालु बताते हैं कि वे यहाँ भगवान शिव के दर्शन के साथ-साथ बिसरख की अनोखी मान्यता को देखना चाहते हैं।
स्थानीय लोगों की भावना
बिसरख निवासी सचिन भाटी ने कहा, “रावण हमारे पूर्वज हैं, उनका दहन कैसे कर सकते हैं? हम अपने गांव की परंपरा पर गर्व महसूस करते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि गांव में रावण के नाम का प्रयोग सम्मान के साथ किया जाता है और भविष्य में भी इस परंपरा को जारी रखने का इरादा है।
देशभर से अलग बिसरख की परंपरा
जहाँ कई शहरों में दशहरा पर रावण दहन के बड़े आयोजन होते हैं, वहीं बिसरख में रावण को सम्मानित करने की अनूठी प्रथा इस गांव को अलग पहचान देती है। यह परंपरा न केवल स्थानीय लोगों की धार्मिक भावना को दर्शाती है, बल्कि भारत की विविधता में एक और रंग जोड़ती है।
मुख्य बातें
- बिसरख को स्थानीय मान्यता के अनुसार रावण की जन्मस्थली माना जाता है।
- दशहरा पर यहाँ रावण का दहन नहीं, बल्कि पूजा और हवन किया जाता है।
- प्राचीन शिव मंदिर में इस वर्ष रावण की नई प्रतिमा स्थापित हुई।
- दशहरा के दिन विशेष हवन, फूलों से सजी प्रतिमा और भव्य आरती का आयोजन होगा।
- स्थानीय लोग रावण को अपने पूर्वज के रूप में सम्मानित करते हैं और इस परंपरा को जारी रखने का इरादा रखते हैं।




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