फेड रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा: मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी उपभोक्ताओं को मिली राहत
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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से कुछ ही हफ्ते पहले फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे उपभोक्ताओं को दो लगातार ईएमआई बढ़ोतरी से राहत मिली। इस निर्णय ने नीति दर को 3.75 %‑4 % की लक्ष्य सीमा में स्थिर रखा और बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
फेड का अक्टूबर निर्णय
फेडरल ओपन मार्केट कमिटी (FOMC) की अक्टूबर बैठक में नीति दर को 3.75 %‑4 % की रेंज में बनाए रखने का फैसला किया गया। यह अपेक्षित था, पर दो सदस्य – गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक – ने 0.25 % की वृद्धि के पक्ष में असहमति जताई। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने इस फैसले पर दोपहर 2:30 ET पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में चर्चा की।
मुख्य बातें
- ब्याज दरें 3.75 %‑4 % की सीमा में स्थिर रही।
- शेयर बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया: नैस्डैक में हल्की गिरावट, जबकि डॉव जोन्स और S&P 500 में हल्का उछाल।
- फेड के दो सदस्य दर वृद्धि के पक्ष में थे, पर अधिकांश ने होल्ड को समर्थन दिया।
- डिसंबर में 0.25 % की वृद्धि की संभावना लगभग 85 % बताई गई।
आर्थिक माहौल और महंगाई की स्थिति
फेड ने कहा कि आर्थिक गतिविधियां तेज गति से बढ़ रही हैं, जबकि महंगाई अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है। प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में 20 % की वृद्धि, टैरिफ से जुड़ी लागतें और AI‑आधारित उद्योगों की तेज़ मांग शामिल हैं। PCE प्राइस इंडेक्स, फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना, अभी भी 2 % लक्ष्य से काफी ऊपर है; सितंबर में हेडलाइन महंगाई 3 % से अधिक रही।
ऊर्जा कीमतों का प्रभाव
ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग $114 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो ईरान‑इज़राइल तनाव और सप्लाई असुरक्षा के कारण बढ़ी हैं। डीजल की कीमतों में भी उछाल आया, जिससे कृषि, परिवहन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में लागत बढ़ी। इन ऊर्जा‑संबंधी लागतों का असर व्यापक अर्थव्यवस्था में महंगाई को और बढ़ा सकता है।
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भविष्य की नीति दिशा
वॉर्श ने बताया कि 2027 में FOMC की बैठक संख्या को आठ तक सीमित किया जाएगा, जिसमें केवल एक बैठक पूरी तरह से रणनीतिक चर्चा के लिए होगी और उस पर कोई नीति‑निर्धारण वोट नहीं होगा। 2028 में दो रणनीतिक और छह नीति‑निर्धारण बैठकों की योजना है। इस संरचना से संकेत मिलता है कि फेड दर वृद्धि के निर्णयों को सीमित करने की कोशिश कर रहा है, पर महंगाई के दबाव के कारण दिसंबर में 0.25 % की वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
बाजार की अपेक्षाएँ
CME फेडवॉच टूल के अनुसार, दिसंबर में दर वृद्धि की संभावना 85 % है। कई अर्थशास्त्री अनुमान लगा रहे हैं कि यदि महंगाई उच्च बनी रही तो 2027 तक प्रत्येक तिमाही में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह से महंगाई के नए आंकड़ों, उपभोक्ता खर्च और वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा।
भारत पर संभावित असर
फेड की नीति में स्थिरता ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निर्णयों पर भी सवाल उठाए हैं। RBI ने अक्टूबर में 0.25 % की वृद्धि की थी, और सितंबर में महंगाई में इजाफा देखा गया। कच्चे तेल और खाद्य कीमतों की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर में RBI भी 0.25 % की वृद्धि कर सकता है, जबकि अन्य का कहना है कि RBI फेड की तरह दरों पर ब्रेक लगा सकता है।
निष्कर्ष
फेडरल रिजर्व का अक्टूबर में दरों को स्थिर रखने का फैसला अमेरिकी उपभोक्ताओं को दो लगातार ईएमआई बढ़ोतरी से बचाया, पर महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक टैरिफ जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। दिसंबर की बैठक में संभावित दर वृद्धि और आगे के आर्थिक संकेतकों पर बाजार की नजर रहेगी, जबकि भारत में RBI की नीति दिशा भी इस अंतरराष्ट्रीय माहौल से प्रभावित होगी।




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