फारूक अब्दुल्ला के कश्मीर बयान पर बीजेपी ने मांगी 140 करोड़ जनता से माफी
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर मुद्दे पर एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली की मंशा को लेकर सवाल उठाए और पाकिस्तान की भूमिका की प्रशंसा की। इस बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं से।
फारूक अब्दुल्ला का विवादित बयान
बारामूला में आयोजित एक पार्टी वर्कर्स के सम्मेलन में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि “अगर पाकिस्तान दुनिया भर में कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाता, तो कश्मीर को बचाना मुश्किल हो जाता”। उन्होंने यह भी कहा कि “दिल्ली की मंशा ठीक नहीं लग रही है” और कश्मीरियों को अपने अधिकारों के लिए स्वयं लड़ना पड़ेगा। इस बयान में उन्होंने पाकिस्तान की प्रशंसा की और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
बीजेपी का तीखा जवाब
जम्मू-कश्मीर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा ने फारूक अब्दुल्ला को निशाने पर लेते हुए कहा कि ऐसे बयानों से देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा, “अगर फारूक अब्दुल्ला को पाकिस्तान से इतना ही प्यार है, तो उन्हें पाकिस्तान जाकर बस जाना चाहिए”। सत शर्मा ने यह भी कहा कि फारूक अब्दुल्ला को केवल मुस्लिम समाज से ही नहीं, बल्कि देश की 140 करोड़ जनता से माफी मांगनी चाहिए।
लेफ्टिनेंट गवर्नर पर भी सवाल
बयान में फारूक अब्दुल्ला ने यह भी आरोप लगाया कि हेल्थ सेक्टर से जुड़ी फाइलें लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के कार्यालय में एक साल से अधिक समय से पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में पढ़ने वाले छात्रों को दो साल तक अस्पताल में काम करना पड़ता है, और यदि वे नहीं करते तो उन्हें राज्य को 40 लाख रुपये देना पड़ता है। यह दावा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
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मुख्य बातें
- फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर मुद्दे पर दिल्ली की मंशा को लेकर सवाल उठाए और पाकिस्तान की प्रशंसा की।
- बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने फारूक अब्दुल्ला से 140 करोड़ भारतीयों से माफी मांगने की मांग की।
- फारूक ने लेफ्टिनेंट गवर्नर के कार्यालय में हेल्थ सेक्टर की फाइलों के पेंडिंग रहने का आरोप लगाया।
- बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक ताना-बाना और एकता के मुद्दे को उजागर किया।
प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव
फारूक अब्दुल्ला के बयान ने कश्मीर मुद्दे पर फिर से चर्चा को भड़का दिया है, जबकि बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय एकता के खिलाफ कहा है। दोनों पक्षों के बीच इस विवाद से भविष्य में कश्मीर से संबंधित नीति चर्चाओं में और अधिक तीव्रता आ सकती है।




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