फर्जी हेल्थ कैंप से आधार‑बायोमेट्रिक चोरी, 3000 से अधिक सिम कार्ड ठगी में इस्तेमाल
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दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में चल रहे फर्जी हेल्थ कैंप के माध्यम से ग्रामीणों के आधार‑कार्ड और बायोमेट्रिक जानकारी चुराकर साइबर ठगी के लिए सिम‑कार्ड एवं ई‑सिम उपलब्ध कराने वाले बड़े नेटवर्क को उजागर किया। इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 3000 से अधिक सिम कार्ड की सक्रियता का पता लगाया।
फर्जी हेल्थ कैंप का संचालन और डेटा चोरी
पुलिस के अनुसार, 20‑21 अक्टूबर 2026 को मथुरा के कोटा गांव में छापेमारी के दौरान 29 वर्षीया जितेंद्र सिंह और 21 वर्षीया बृजेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने ग्रामीण इलाकों में सस्ती दवाइयाँ और इलाज का वादा कर फर्जी हेल्थ कैंप लगाए। कैंप में उपस्थित ग्रामीणों से आधार‑कार्ड और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आइरिस) डेटा एकत्र किया जाता था। यह जानकारी बाद में सिम‑कार्ड एवं ई‑सिम की खरीद‑फरोख्त में इस्तेमाल की गई।
सिम‑कार्ड और ई‑सिम का व्यापारिक मॉडल
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम जैसे सोशल‑मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर पहले से सक्रिय ई‑सिम की खरीद‑फरोख्त की। फिजिकल सिम को ई‑सिम में बदलकर उसका QR कोड अन्य खरीदारों तक पहुँचाया जाता था। दोनों प्रतिदिन 20‑30 ई‑सिम की ट्रेडिंग करते थे। एक सक्रिय सिम को 800‑1200 रुपये में खरीदकर 2000 रुपये तक बेच दिया जाता था। लेन‑देन में USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग होने की संभावना है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.64 करोड़ रुपये की ठगी
यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.64 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े मामले की जांच के दौरान हुई। शिकायतकर्ता को व्हाट्सऐप पर कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर दो हफ्तों तक मानसिक दबाव में रखा गया और छह बैंक खातों में RTGS के माध्यम से कुल 6 ट्रांजैक्शन करवा कर रकम ले ली गई। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 20 से अधिक शिकायतों में कुल 2.64 करोड़ रुपये की ठगी का संकेत मिला, जिनमें कई सिम‑कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े थे।
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पुलिस की वर्तमान जांच और नागरिकों के लिए चेतावनी
पुलिस ने बरामद किए गए तीन मोबाइल फोन, डिजिटल लेन‑देन रिकॉर्ड और सिम‑सप्लाई नेटवर्क की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। साथ ही, नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनजान व्यक्तियों के साथ आधार OTP, सिम एक्टिवेशन कोड या अन्य सत्यापन‑संबंधी जानकारी साझा न करें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धमकी देकर पैसे मांगना अब एक प्रमुख साइबर ठगी का तरीका बन चुका है, जिसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बातें
- दिल्ली पुलिस ने मथुरा के फर्जी हेल्थ कैंप में आधार‑बायोमेट्रिक डेटा चुराकर सिम/ई‑सिम ठगी का नेटवर्क उजागर किया।
- जुड़वां आरोपियों (जितेंद्र सिंह, 29; बृजेश कुमार, 21) को 20‑21 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
- पिछले एक साल में 3000 से अधिक सिम कार्ड सक्रिय या सप्लाई किए गए।
- एक सिम को 800‑1200 रुपये में खरीदकर 2000 रुपये तक बेचा जाता था; लेन‑देन में USDT क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग हुआ।
- डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.64 करोड़ रुपये की ठगी, कुल 2.64 करोड़ रुपये की शिकायतें NCRP पर दर्ज।
- पुलिस ने नागरिकों को आधार OTP, सिम एक्टिवेशन कोड जैसी संवेदनशील जानकारी साझा न करने की चेतावनी दी।
जांच जारी है और पुलिस ने कहा है कि विदेशी संपर्कों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।




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