दशहरा 2026: रावण दहन का शुभ प्रदोष काल – कब शुरू और कब समाप्त
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आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को देशभर में विजयादशमी का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष रावण दहन का शुभ मुहूर्त शाम 5:47 बजे से रात 8:23 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसे प्रदोष काल कहा जाता है। इस लेख में हम इस मुहूर्त के विवरण, धार्मिक महत्व और मुख्य बातों को विस्तार से प्रस्तुत करेंगे।
रावण दहन का मुहूर्त – समय सारणी
पंचांग के अनुसार, 2026 में दशहरे पर रावण दहन के लिए प्रदोष काल का समय इस प्रकार है:
- दशहरा तिथि: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
- प्रदोष काल शुरू: शाम 5:47 बजे
- प्रदोष काल समाप्त: रात 8:23 बजे
- कुल अवधि: 2 घंटे 36 मिनट
यह अवधि सूर्यास्त के बाद आती है और कई धार्मिक ग्रंथों में इसे शुभ माना गया है। स्थानीय समय और सूर्यास्त के अंतर के कारण कुछ शहरों में थोड़ा बदलाव हो सकता है, पर अधिकांश स्थानों में यही समय प्रमुख रूप से अपनाया जाएगा।
प्रदोष काल क्यों माना जाता है विशेष?
हिंदू धर्म में प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास की वह अवधि है, जब सूर्य की रोशनी धीरे‑धीरे घटती है और अंधकार का आगमन शुरू होता है। इस समय को पवित्र माना जाता है और कई अनुष्ठानों में इसे शुभ समय के रूप में उपयोग किया जाता है। दशहरे पर भी इस काल में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं, जिससे अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक स्थापित होता है।
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दशहरे का धार्मिक महत्व
दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया और माता सीता को बचाया। इसी विजय को याद करने के लिए रावण के पुतले को जलाया जाता है। कई स्थानों पर इस दिन रामलीला का मंचन भी किया जाता है, जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन, वनवास और लंका युद्ध की कथा दर्शायी जाती है।
मुख्य बातें
- दशहरा 2026 का रावण दहन मुहूर्त शाम 5:47 बजे से रात 8:23 बजे तक है।
- प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद की अवधि है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में शुभ माना जाता है।
- इस दिन रामलीला, शस्त्र पूजा और मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मुहूर्त में शुभ कार्यों की शुरुआत करना लाभकारी माना जाता है।
स्थानीय विविधताएँ
देश के विभिन्न हिस्सों में रावण दहन का समय सूर्यास्त के स्थानीय समय के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। कुछ शहरों में रावण दहन को सूर्यास्त के तुरंत बाद ही शुरू किया जाता है, जबकि अन्य में प्रदोष काल के अंत तक जारी रखा जाता है। इसलिए, स्थानीय पंचांग या निकटवर्ती मंदिर की घोषणा पर ध्यान देना आवश्यक है।
निष्कर्ष
दशहरा 2026 में रावण दहन का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल के भीतर निर्धारित किया गया है, जो धार्मिक परम्पराओं के अनुसार अत्यंत अनुकूल माना जाता है। इस अवसर पर लोग न केवल रावण के पुतले को जलाते हैं, बल्कि रामलीला, शस्त्र पूजा और मां दुर्गा के विसर्जन जैसे अनुष्ठानों में भाग लेकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं।




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