डिजिटल डिटॉक्स की नई लहर: युवा नेचर वॉक, पॉटरी और बुनाई में खोज रहे सुकून
4 मिनट में पढ़ें

रील्स और सोशल मीडिया की निरंतर ध्वनि से थक कर युवा अब असली दुनिया की ओर मुड़ रहे हैं। फोन की स्क्रीन से अंगूठा हटाकर मिट्टी को आकार देना, बुनाई करना या पार्क में पौधों के बीच टहलना उनका नया ‘टच ग्रास’ बन गया है। इस बदलाव के पीछे डिजिटल डिटॉक्स की बढ़ती चाह और मानसिक स्वास्थ्य की चिंता प्रमुख कारण बन रही है।
डिजिटल डिटॉक्स में बढ़ती रुचि
गूगल की 28 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, साल की शुरुआत से ‘फोन और इंटरनेट से ब्रेक कैसे लें’ जैसी सर्च क्वेरी में 110 % की वृद्धि दर्ज हुई। साथ ही ‘टच ग्रास’ शब्द को समझने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या में 90 % की उछाल आया। यह दर्शाता है कि युवा वर्ग में स्क्रीन‑फ्री जीवनशैली की जिज्ञासा तेज़ी से बढ़ रही है।
सोशल मीडिया पर बिताया समय
ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को‑ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) की 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि कई देशों में 15‑साल के टीनएजर्स हर हफ्ते औसतन 35 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं, यानी लगभग पाँच घंटे रोज़ाना। लगातार रील्स, मीम्स और नोटिफिकेशन से घिरे रहने से ‘क्रॉनिकली ऑनलाइन’ स्थिति बनती है, जिससे थकान और तनाव की भावना उत्पन्न होती है।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
मनोचिकित्सक समीर मल्होत्रा के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम एक कंपलसिव बिहेवियरल डिसऑर्डर में बदल सकता है। यदि मोबाइल का उपयोग पढ़ाई, काम, नींद या रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा हो, तो पेशेवर मदद लेना आवश्यक है। उन्होंने डिजिटल डिटॉक्स के शुरुआती चरण में FOMO (फ़ियर ऑफ़ मिसिंग आउट) से निपटने के लिए कुछ सरल उपाय सुझाए हैं:
आपके लिए संबंधित खबरें
- गैरज़रूरी नोटिफिकेशन बंद करें।
- फोन को दूर रखें और उसे देखने की इच्छा पर 10 मिनट रुकने की कोशिश करें।
- छोटे‑छोटे बदलावों से शुरू करें, जैसे सुबह के पहले 30 मिनट और सोने से पहले आखिरी 30 मिनट फोन‑फ्री रखें।
‘टच ग्रास’ के तहत लोकप्रिय हॉबीज़
पिंटरेस्ट की 25 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि 51 % युवा अपनी पसंदीदा गतिविधियों को असली खुशी से जोड़ते हैं। विशेष रूप से, सूखे फूलों की सजावट, पक्षियों की तस्वीरें और प्रकृति की फ़ोटोग्राफी जैसी सर्च में क्रमशः 457 %, 232 % और 210 % की वृद्धि देखी गई। इस प्रवृत्ति ने पॉटरी, बुनाई और नेचर वॉक को लोकप्रिय विकल्प बना दिया है।
पॉटरी और बुनाई क्यों बनाते हैं सुकून
डॉ. मल्होत्रा बताते हैं कि पॉटरी और बुनाई जैसी रचनात्मक गतिविधियाँ ‘फ़्लो स्टेट’ उत्पन्न करती हैं, जहाँ व्यक्ति पूरी तरह काम में डूब जाता है और अन्य विचारों से ध्यान हट जाता है। 2025 में जर्नल ऑफ़ एनवायरनमेंटल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक रिसर्च ने भी नेचर वॉक को तनाव कम करने और सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाने का प्रभावी तरीका साबित किया।
डिजिटल डिटॉक्स को रोज़मर्रा की आदत बनाना
डिजिटल डिटॉक्स को स्थायी बनाने के लिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित कदम सुझाए हैं:
- सुबह उठते ही पहले 30 मिनट स्क्रीन‑फ्री रखें।
- काम के बीच 5‑मिनट के ब्रेक में रील्स देखने के बजाय बालकनी या बगीचे में टहलें।
- हफ़्ते में कम से कम एक दिन नेचर वॉक, पॉटरी या बुनाई के लिए निर्धारित करें।
- बच्चों के स्क्रीन टाइम को घटाने के लिए डाइनिंग टेबल और बेडरूम को फोन‑फ्री ज़ोन बनाएं, और माता‑पिता भी वही नियम अपनाएँ।
इंटरनेट से दूरी नहीं, संतुलन जरूरी
युवा पूरी तरह इंटरनेट को नहीं छोड़ रहे। वे पॉटरी सीखने, नेचर वॉक ग्रुप खोजने और बुनाई के वीडियो देखने के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। ‘टच ग्रास’ का मूल उद्देश्य फोन फेंक देना नहीं, बल्कि स्क्रीन से नजर हटाकर असली जीवन के लिए समय निकालना है। हर खूबसूरत पल को पोस्ट करने की बजाय, पार्क में टहलना या मिट्टी से कुछ बनाना भी पर्याप्त सुकून प्रदान कर सकता है।
मुख्य बातें
- गूगल की रिपोर्ट के अनुसार ‘डिजिटल डिटॉक्स’ सर्च में 110 % की वृद्धि।
- OECD के आंकड़े: 15‑साल के टीनएजर्स औसतन 35 घंटे/हफ़्ता सोशल मीडिया पर।
- पिंटरेस्ट के डेटा में नेचर‑संबंधी सर्च में 210‑232‑457 % की बढ़ोतरी।
- डॉ. मल्होत्रा के अनुसार पॉटरी, बुनाई और नेचर वॉक ‘फ़्लो स्टेट’ बनाते हैं, जिससे तनाव कम होता है।
- डिजिटल डिटॉक्स के लिए सुबह‑और‑रात के 30 मिनट स्क्रीन‑फ्री, हफ़्ते में एक दिन ऑफ‑लाइन हॉबी, और नोटिफिकेशन नियंत्रण आवश्यक।
डिजिटल युग में स्क्रीन‑टाइम को नियंत्रित करके युवा न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना रहे हैं, बल्कि रचनात्मकता और सामाजिक जुड़ाव को भी नई दिशा दे रहे हैं। यह बदलाव न केवल व्यक्तिगत सुकून का स्रोत है, बल्कि समाज में स्वस्थ डिजिटल संस्कृति को भी प्रोत्साहित करता है।




टिप्पणियाँ
0