दिल्ली की जेलों में भ्रष्टाचार पर सख्ती: 3 साल से अधिक समय तक एक ही जगह पर रहे अफसरों का होगा तत्काल ट्रांसफर
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दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने जेल प्रशासन में भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और कदाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने का इशारा दिया। उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद 3 साल से अधिक समय तक एक ही जगह पर तैनात अधिकारियों की पहचान कर उनका तुरंत तबादला करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कदम जेलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अधिकारी तबादला और रिकॉर्ड जांच
दिल्ली सरकार ने यह आदेश दिया है कि सभी जेलों में 3 साल से अधिक समय तक एक ही स्थान पर रहे अधिकारियों की सूची तैयार की जाए और उन्हें तुरंत अन्य जेलों में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार या कदाचार के आरोप लगे हैं, उनके पिछले 10 वर्षों के तैनाती रिकॉर्ड भी माँगे गए हैं। यह कदम न केवल स्वार्थी प्रथाओं को रोकने के लिए है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता को भी बढ़ावा देगा।
संवेदनशील विभागों पर विशेष निगरानी
सरकार ने जेल प्रशासन के संवेदनशील विभागों – जैसे सीपीआरओ, फैक्ट्री, खरीद (प्रोक्योरमेंट) विंग, पहली बार अपराध करने वाले कैदी, आर्थिक अपराधों से जुड़े कैदी और सिविल बंदियों के लिए निर्धारित जेलों – पर विशेष निगरानी रखने का निर्णय लिया है। इन विभागों में तैनात अधिकारियों की सूची तैयार कर, निर्धारित अवधि से अधिक समय तक एक ही स्थान पर रहे अधिकारियों का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।
कैदियों की सुविधाओं की गुणवत्ता जांच
जेलों में बंद कैदियों को मिलने वाले भोजन और दवाइयों की गुणवत्ता की भी कड़ी जांच की जाएगी। अधिकारियों को भोजन व दवाइयों की बाजार दरों का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है, जिससे खरीद प्रक्रिया में संभावित वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सके और कैदियों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।
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तस्करी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक
जेलों के भीतर तंबाकू और मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने हेतु आधुनिक स्कैनिंग तकनीक अपनाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। ऐसी तकनीक के उपयोग से बिना कैदियों को नुकसान पहुँचाए प्रतिबंधित पदार्थों का पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, सुरक्षा संबंधी चूक और कर्मचारियों के कदाचार से जुड़ी लंबित शिकायतों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR) को तय समय-सीमा के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है।
आशीष सूद का जीरो टॉलरेंस संदेश
आशीष सूद ने कहा कि जेलों जैसे सुधारात्मक संस्थानों में भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और व्यवस्थित कमियों के प्रति सरकार की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों का तबादला करने से निहित स्वार्थों पर अंकुश लगेगा और प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकार जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने, कैदियों के कल्याण से जुड़े मामलों की निगरानी करने और प्रत्येक शिकायत का समय पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्य बातें
- 3 साल से अधिक समय तक एक ही जगह पर रहे जेल अधिकारियों का तत्काल तबादला.
- भ्रष्टाचार के आरोपों वाले अधिकारियों के 10 साल के तैनाती रिकॉर्ड की मांग.
- सीपीआरओ, फैक्ट्री, प्रोक्योरमेंट विंग आदि संवेदनशील विभागों पर विशेष निगरानी.
- कैदियों को मिलने वाले भोजन व दवाइयों की गुणवत्ता और बाजार दरों का सत्यापन.
- तंबाकू व मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए आधुनिक स्कैनिंग तकनीक अपनाने की संभावना.
- शिकायतों की कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) को तय समय-सीमा में जमा करने का निर्देश.
- जेल प्रशासन में भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और कदाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति.




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