दिल्ली हाईकोर्ट ने AI‑डिपफेक वीडियो हटाने का आदेश, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की गरिमा की रक्षा
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दिल्ली हाईकोर्ट ने आज शुक्रवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लक्षित कर बनाए गए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)‑डिपफेक वीडियो और पोस्ट को हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि स्वस्थ आलोचना और व्यंग्य लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, परन्तु महिला मुख्यमंत्री की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले किसी भी प्रकार के कंटेंट को राजनीतिक व्यंग्य नहीं माना जा सकता।
केस की पृष्ठभूमि
आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली यूनिट और पार्टी के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल तथा फेसबुक पेज पर शेयर किए गए वीडियो में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को शराब विक्रेता के रूप में दिखाया गया था। यह सामग्री AI‑डिपफेक तकनीक से तैयार की गई थी और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुई।
हाईकोर्ट का निर्णय
जस्टिस मनोज जैन की अदालत (CS(OS) 1019/2026) ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस प्रकार का कंटेंट मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत गरिमा और नैतिक चरित्र को नुकसान पहुँचाने की क्षमता रखता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल को सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है, परन्तु AI‑डिपफेक के माध्यम से महिला मुख्यमंत्री को अपमानजनक रूप में प्रस्तुत करना “स्वीकार्य राजनीतिक व्यंग्य” नहीं है।
कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 3, 4 और 5 को निर्देश दिया कि विवादित सभी छह यूआरएल को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। साथ ही प्रतिवादियों को समन जारी कर 30 दिनों के भीतर लिखित बयान दाखिल करने का आदेश दिया गया। अगली सुनवाई 4 दिसंबर को निर्धारित है।
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मुख्य बातें
- हाईकोर्ट ने AI‑डिपफेक वीडियो को हटाने का आदेश दिया।
- कोर्ट ने कहा कि महिला मुख्यमंत्री की गरिमा पर हमला गंभीर मामला है।
- राजनीतिक व्यंग्य का अधिकार है, परन्तु अपमानजनक कंटेंट स्वीकार्य नहीं।
- प्रतिवादियों को 30 दिनों में लिखित बयान देना अनिवार्य।
- अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी।
कानूनी दृष्टिकोण
हाईकोर्ट ने इस मामले को “मानहानिकारक और आपत्तिजनक” कहा और यह स्पष्ट किया कि संवैधानिक पद पर बैठी महिला के खिलाफ ऐसी सामग्री न केवल व्यक्तिगत गरिमा को चोट पहुँचाती है, बल्कि सार्वजनिक हित के लिए भी हानिकारक है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित सामग्री को हटाने के आदेश का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
भविष्य में संभावित प्रभाव
यह निर्णय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर AI‑डिपफेक सामग्री के नियमन में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है। राजनीतिक दलों और सोशल‑मीडिया कंपनियों को भविष्य में ऐसी सामग्री के निर्माण और प्रसार से बचने के लिए सख्त निगरानी और त्वरित हटाने की प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता होगी।




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