दौलत राम कॉलेज की प्राचार्या को हटाने की मांग पर कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन, दिवाली को काला दिवस मनाया
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दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज के कर्मचारी प्राचार्या के हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। इस बार उन्होंने दिवाली को भी काला दिवस बना कर धरना स्थल पर मनाया, जबकि 3 नवंबर से छह सदस्य अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
धरणा का प्रारम्भ और दिवाली का काला दिवस
दौलत राम कॉलेज के कर्मचारियों ने 6 अक्टूबर से विश्वविद्यालय के गेट नंबर‑1 पर 24 घंटे का धरना देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि जब तक प्राचार्या के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान, कर्मचारियों ने दिवाली को काला दिवस के रूप में मनाया, यह दर्शाते हुए कि वे अपने संघर्ष को किसी भी त्यौहार या सामाजिक कार्यक्रम से ऊपर मानते हैं।
भूख हड़ताल की शुरुआत
डिल्ली विश्वविद्यालय एवं कॉलेज कर्मचारी यूनियन (DUCKU) के नेतृत्व में 3 नवंबर से छह कर्मचारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे। इनमें दो महिला और चार पुरुष कर्मचारी शामिल हैं। एक महिला कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, पर बाकी सदस्य अपनी मांगों को लेकर हड़ताल जारी रखे हुए हैं।
यूनियन की मांगें और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
DUCKU का कहना है कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ कई दौर की बैठकें कीं, पर अभी तक प्राचार्या के निलंबन या बर्खास्तगी का कोई आदेश नहीं आया। यूनियन का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ठोस कार्रवाई की कमी के कारण कर्मचारियों को लगातार धरना‑प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
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मुख्य मांगें
- दौलत राम कॉलेज की प्राचार्या का निलंबन और पद से बर्खास्तगी।
- निलंबित कर्मचारियों को न्याय दिलाना।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद ही आंदोलन समाप्त करना।
DUCKU के नेताओं का आह्वान
DUCKU के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा और महासचिव रवींद्र कुमार पांडे ने सभी विश्वविद्यालय कर्मचारियों से अपील की कि वे दिवाली के दौरान भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरे कर्मचारी वर्ग की एकता, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।
आगे का रास्ता
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षा है कि वह शीघ्र ही प्राचार्या के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे, जिससे इस विवाद का समाधान हो सके और शैक्षणिक माहौल सामान्य हो सके।
इस संघर्ष के दौरान छात्रों, अभिभावकों और अन्य स्टाफ़ के बीच भी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि निरंतर धरना और भूख हड़ताल से कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।




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