कांग्रेस ने अमित शाह की SIR चुनौती को स्वीकार किया, पर शर्त रखी
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की चुनौती दी, जबकि कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया पर एक शर्त रखी। यह कदम तब आया जब SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीव्र बहस चल रही थी।
अमित शाह का प्रस्ताव और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
अमित शाह ने हाल ही में हैदराबाद में एक रैली में कहा कि सरकार SIR पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। उन्होंने विपक्षी नेता राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस इस सत्र में भाग लेती है तो वह चर्चा के लिए मंच तैयार है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रस्ताव पर विचार किया और एक निर्णय लिया। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, पार्टी इस विशेष सत्र में भाग लेने को तैयार है, पर शर्त यह है कि वर्तमान CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो और SIR प्रक्रिया को रद्द किया जाए।
पिछले सत्र में विपक्ष की मांग और सरकार का तर्क
पिछले संसद सत्र में विपक्ष ने SIR पर चर्चा की मांग की थी। सरकार ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कार्यों पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती। इस कारण से SIR पर कोई पारदर्शी बहस नहीं हो पाई।
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जयराम रमेश का ट्विटर बयान
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्विटर (अब X) पर लिखा कि संसद का मानसून सत्र 82 दिन से स्थगित है और अभी तक सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार पर परिसीमन विधेयक (delimitation bill) को लेकर विशेष सत्र बुलाने का इशारा किया, जिसे उन्होंने 2029 में बीजेपी को हार से बचाने का मकसद बताया। रमेश ने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की, ताकि विपक्ष को नई प्रस्तावों की जानकारी मिल सके।
मुख्य बातें
- अमित शाह ने SIR पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की चुनौती दी।
- कांग्रेस इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, पर शर्त रखती है कि CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो और SIR प्रक्रिया रद्द हो।
- पिछले सत्र में सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग के कार्यों पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती।
- कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार की रणनीति को उजागर किया।
- रमेश ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की, ताकि विपक्ष को नई प्रस्तावों की जानकारी मिल सके।
आगे क्या हो सकता है?
यदि सरकार विशेष सत्र बुलाती है और कांग्रेस की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, यदि सरकार शर्तों को मानती है, तो SIR प्रक्रिया का पुनरावलोकन या रद्दीकरण हो सकता है, जिससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर प्रश्न उठेंगे। इस मुद्दे पर आगे की राजनीतिक गतिशीलता को देखना बाकी है।




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