CNG बनाम EV: TERI की लाइफ़साइकिल स्टडी ने दिखाया पर्यावरण पर कौन सी कार बेहतर
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भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सरकार इलेक्ट्रिक (EV) और सीएनजी (CNG) वाहनों को समान रूप से प्रोत्साहित कर रही है। सड़कों पर इन दोनों प्रकार की कारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन यह सवाल अभी भी बना रहता है – कौन सी तकनीक पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल है? द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की हालिया लाइफ़साइकिल‑आधारित स्टडी ने इस प्रश्न का उत्तर दिया, और बताया कि वर्तमान में CNG कारें कुल उत्सर्जन के हिसाब से EV से बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
स्टडी की पद्धति: वेल‑टू‑व्हील एनालिसिस
TERI ने “वेल‑टू‑व्हील” (Well‑to‑Wheel) एनालिसिस अपनाई, जिसमें ईंधन या बिजली के उत्पादन से लेकर वाहन के चलने तक के सभी चरणों में उत्पन्न ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को जोड़ा गया। इस दृष्टिकोण में दो मुख्य घटक शामिल हैं:
- फ्यूल‑टू‑वील (Fuel‑to‑Wheel): CNG या पेट्रोल‑डिज़ल जैसी फ्यूल को उत्पादन, परिवहन और वाहन में जलाने तक के उत्सर्जन।
- पावर‑टू‑वील (Power‑to‑Wheel): इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने के लिए आवश्यक बिजली के उत्पादन (कोयला, सौर, पवन आदि) से जुड़ा उत्सर्जन।
इन दोनों को मिलाकर कुल लाइफ़साइकिल एमिशन निकाला गया और CNG वि. EV की तुलना की गई।
मुख्य निष्कर्ष
- वर्तमान भारतीय पावर मिक्स में लगभग 70 % बिजली कोयले से उत्पन्न होती है। इस कारण EV को चार्ज करने पर भी काफी कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जित होता है।
- CNG का उत्पादन, वितरण और उपयोग करने वाले वाहन की पूरी लाइफ‑साइकिल में उत्पन्न कुल GHG उत्सर्जन EV की तुलना में कम पाया गया।
- EV की बड़ी लिथियम‑आधारित बैटरी के निर्माण में खनन, ऊर्जा‑गहन प्रक्रिया और अंत‑जीवन रीसाइक्लिंग की समस्याएँ अतिरिक्त पर्यावरणीय बोझ बनाती हैं।
- यदि भविष्य में भारत का पावर मिक्स 50 % से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल) पर आधारित हो जाता है, तो EV का कुल लाइफ़साइकिल एमिशन CNG से नीचे गिर सकता है।
CNG के फायदे – क्यों अभी बेहतर विकल्प
CNG, पेट्रोल और डीज़ल की तुलना में कम कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) उत्सर्जित करता है। TERI की स्टडी में यह देखा गया कि CNG के उत्पादन (मुख्यतः प्राकृतिक गैस का शोधन) और वितरण (पाइपलाइन या टैंकर) के दौरान उत्पन्न उत्सर्जन, EV के लिए आवश्यक बिजली उत्पादन के मुकाबले कम है। साथ ही, CNG कारों में EV जैसी भारी बैटरी नहीं होती, इसलिए बैटरी निर्माण और रीसाइक्लिंग से जुड़ी अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसें नहीं आतीं।
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EV की चुनौतियाँ – बैटरी और बिजली स्रोत
इलेक्ट्रिक कारों की प्रमुख पर्यावरणीय चुनौती दो पहलुओं में निहित है:
- बिजली स्रोत: भारत में अभी भी कोयला‑आधारित पावर प्लांट प्रमुख हैं। कोयला जलाने से बड़ी मात्रा में CO₂, SO₂ और पार्टिकुलेट मैटर (PM) निकलते हैं, जो EV के कुल उत्सर्जन को बढ़ाते हैं।
- बैटरी उत्पादन एवं अंत‑जीवन: लिथियम‑आयन बैटरी बनाने में लिथियम, कोबाल्ट, निकल आदि खनिजों का खनन, रिफाइनिंग और असेंबली शामिल है, जो ऊर्जा‑गहन प्रक्रिया है। पुरानी बैटरियों का उचित रीसाइक्लिंग न होने पर पर्यावरण में भारी धातु और रसायन छोड़ सकते हैं।
भविष्य की दिशा: स्वच्छ ऊर्जा और हाइब्रिड विकल्प
स्टडी यह नहीं कहती कि EV पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं; बल्कि यह बताती है कि वर्तमान में EV का कुल प्रभाव मुख्यतः चार्जिंग के बिजली स्रोत पर निर्भर करता है। यदि भारत में सौर, पवन और जल ऊर्जा का हिस्सा बढ़े, तो EV का लाइफ़साइकिल एमिशन घटेगा और वह CNG से बेहतर विकल्प बन जाएगा। इस संदर्भ में CNG‑हाइब्रिड तकनीक को एक अंतरिम समाधान के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ वाहन चलाते समय CNG का उपयोग और ब्रेकिंग‑रेजेनरेशन से उत्पन्न बिजली बैटरी को चार्ज की जा सकती है।
निष्कर्ष
TERI की इस विस्तृत स्टडी ने यह स्पष्ट किया कि भारत में वर्तमान पावर मिक्स को देखते हुए CNG कारें अपनी पूरी लाइफ‑साइकिल में इलेक्ट्रिक कारों से कम पर्यावरणीय नुकसान करती हैं। लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं है; जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ेगा, EV का कुल उत्सर्जन घटेगा और वह अधिक टिकाऊ विकल्प बन जाएगा। नीति निर्माताओं को इस दो‑धारी दृष्टिकोण को समझते हुए, नवीकरणीय ऊर्जा को तेज़ी से बढ़ावा देना और बैटरी रीसाइक्लिंग बुनियादी ढाँचा विकसित करना आवश्यक है।




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