सिंटा चुनाव विवाद: हाई कोर्ट ने 20 अक्टूबर के चुनाव और नतीजों पर रोक लगाई
3 मिनट में पढ़ें

सिने और टीवी कलाकार संघ (सिंटा) के चुनाव को लेकर चल रहे गुटबाजी में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए 20 अक्टूबर को हुए चुनाव और उसके नतीजों पर रोक लगा दी है। अदालत ने चुनाव कराने वाले गुट से सवाल किया कि 26 अक्टूबर तक नया काम करने की अनुमति न मिलने के बावजूद चुनाव क्यों कराए गए। इस निर्णय ने उपासना सिंह और पूनम ढिल्लों के गुटों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
कोर्ट की सुनवाई और कारण बताओ नोटिस
न्यायमूर्ति आरती साठे ने पश्चिमी भारत फिल्म कर्मचारी महासंघ (WBFCA) की याचिका पर सुनवाई के दौरान सिंटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अदालत ने पूछा कि पहले दिए गए आदेशों के बावजूद चुनाव कराना और नतीजे घोषित करना जानबूझकर अनदेखी क्यों माना जा रहा है। फिलहाल, 20 अक्टूबर के चुनाव और उसके नतीजों को लागू करने पर रोक लगा दी गई है।
उपासना सिंह के आरोप
उपासना सिंह ने सिंटा की कई फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तोड़ी जाने और पैसे के उपयोग की जानकारी न मिलने का आरोप लगाया। उन्होंने संगठन के वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग की और कहा कि पहले से पंजाब नेशनल बैंक में खाता होने के बावजूद दूसरा खाता खोलने की जरूरत क्यों पड़ी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेश के बाद भी सिंटा के दस्तावेज टैक्सी और ऑटो में ले जाए जा रहे थे।
पिछले चुनाव और परिणाम
पश्चिमी भारत फिल्म कर्मचारी महासंघ ने 12 सितंबर को चुनाव कराए थे, जिसमें उपासना सिंह को 360 वोट और साहिला चड्ढा को 357 वोट मिले। इसके बाद पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरी के गुट ने 20 अक्टूबर को अलग चुनाव कराया, जिसमें पद्मिनी को 604 वोट और पूनम को 601 वोट मिले। अब सभी की नजर 26 अक्टूबर को निर्धारित सुनवाई पर है।
आपके लिए संबंधित खबरें
अवमानना नोटिस का प्रभाव
सिंटा को जारी किए गए अवमानना नोटिस का मतलब यह नहीं है कि तुरंत सजा होगी। यदि अदालत में यह साबित हो जाता है कि आदेश जानबूझकर तोड़े गए हैं, तो कानून के तहत सजा हो सकती है। पूर्व वरिष्ठ सचिव हेमंत पाण्डेय ने अदालत के फैसले का स्वागत किया और कहा कि उन्हें संविधान और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।
मुख्य बातें
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने 20 अक्टूबर के सिंटा चुनाव और नतीजों पर रोक लगाई।
- अदालत ने चुनाव कराने वाले गुट से आदेशों की अनदेखी पर सवाल किया।
- उपासना सिंह ने सिंटा के वित्तीय लेनदेन और दस्तावेज़ों के परिवहन पर आरोप लगाए।
- पिछले दो चुनावों में उपासना सिंह (360 वोट) और पद्मिनी कोल्हापुरी (604 वोट) प्रमुख रहे।
- अवमानना नोटिस के बाद सजा तभी होगी जब जानबूझकर आदेश तोड़ने का प्रमाण मिले।




टिप्पणियाँ
0