चौरी-चौरा में 172 क्रांतिकारियों की फांसी, नेहरू नहीं आए बचाने: योगी आदित्यनाथ का दावा
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को चौरी-चौरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को उजागर किया। उन्होंने 4 फरवरी 1922 की चौरी-चौरा घटना में अंग्रेजों द्वारा 172 क्रांतिकारियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पैरवी न करने का आरोप लगाया।
चौरी-चौरा कांड का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
चौरी-चौरा कांड में किसानों, मजदूरों और व्यापारियों सहित 172 लोगों को अंग्रेजी सरकार ने फांसी की सजा सुनाई। इस कांड ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक गहरा प्रभाव डाला। योगी ने कहा कि इस सजा के बाद नेहरू ने किसी भी प्रकार की पैरवी नहीं की, जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय ने अपने प्रभाव का उपयोग कर 151 क्रांतिकारियों को फांसी से बचाने में सफल रहे।
मालवीय की भूमिका
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने अपने वकीली कौशल और राजनीतिक प्रभाव से 151 क्रांतिकारियों को फांसी के फंदे से बचाया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालवीय के इस योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया।
मुख्य बातें
- 4 फरवरी 1922 को अंग्रेजों ने चौरी-चौरा में 172 क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाई।
- जवाहरलाल नेहरू ने इस सजा के बाद किसी भी प्रकार की पैरवी नहीं की, जैसा कि योगी ने आरोप लगाया।
- पंडित मदन मोहन मालवीय ने 151 क्रांतिकारियों को बचाने में सफलता पाई।
- मुख्यमंत्री ने 21 शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिनमें नजर अली, कोमल सिंह यादव, लाल मोहम्मद, बेगू तिवारी, अब्दुल्ला और श्याम सुंदर शामिल हैं।
- कार्यक्रम में 288 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया गया।
- नए ओवरब्रिज को “शहीद स्मारक ओवरब्रिज” नाम देने का प्रस्ताव रखा गया।
शहीद स्मारक और विकास कार्य
चौरी-चौरा के शहीदों की याद में एक शहीद स्मारक का निर्माण किया गया है। इस क्षेत्र में 288 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिसमें ओवरब्रिज, सड़कों का विस्तार और बुनियादी ढांचे का सुधार शामिल है। योगी ने बताया कि भोपा बाजार में रेलवे लाइन के कारण पहले ट्रैफिक जाम की समस्या थी, अब ओवरब्रिज बनने से लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने इस पुल का नाम “शहीद स्मारक ओवरब्रिज” रखने का सुझाव दिया।
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समाज में विभाजन का प्रभाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि चौरी-चौरा घटना के बाद भारतीय समाज बंटा हुआ था, जिससे ब्रिटिश शासन को पकड़ बनाने में मदद मिली। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस कांड के बाद अपना आंदोलन स्थगित कर दिया, जबकि स्थानीय क्रांतिकारी संघर्ष जारी रहे।
निष्कर्ष
योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा कि उन शहीदों के योगदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि यह स्मारक और विकास कार्य शहीदों के बलिदान को सम्मानित करने का प्रतीक हैं और जनता को उनके प्रति कर्तव्यबोध की याद दिलाते हैं।




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