बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में SIR के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर रोक लगाने से इनकार किया
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महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तक रोक का आदेश माँगा था। परन्तु बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ में इस मांग को खारिज कर दिया और कहा कि अदालत न्यायिक मर्यादा का पालन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट का पूर्व आदेश
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट्स को अपने-अपने राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया की वैधता या उससे जुड़े मामलों पर सुनवाई करने से रोक दिया था। इस आदेश के तहत कई हाई कोर्टों ने SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया, जबकि कुछ अदालतों ने याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट के रुख का अनुसरण करने को कहा।
बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की यह मांग कि “सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए” को स्वीकार नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि “हम ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करेंगे” और अदालत न्यायिक मर्यादा के भीतर कार्य करेगी।
सुनवाई का स्थगन
कोर्ट को बताया गया कि SIR से जुड़ा मामला 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इस कारण बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को तीन सप्ताह के लिए टाल दिया।
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मुख्य बातें
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया।
- मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि अदालत “न्यायिक मर्यादा” का पालन करेगी और कोई रोक आदेश नहीं देगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में सभी हाई कोर्ट्स को SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई रोकने का आदेश दिया था।
- संबंधित मामला 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है; हाई कोर्ट ने सुनवाई को तीन सप्ताह के लिए टाल दिया।
यह निर्णय महाराष्ट्र में आगामी चुनावों के संदर्भ में वोटर लिस्ट की शुद्धता और वैधता पर प्रश्न उठाता है, क्योंकि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है, परन्तु इस प्रक्रिया के दौरान नाम हटाने को लेकर कानूनी चुनौती भी बनी हुई है।




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