BJP ने SIR मुद्दे पर मेगा जमीनी अभियान शुरू किया, 24 पन्नों का डॉकेट तैयार
3 मिनट में पढ़ें

विपक्ष द्वारा उठाए गए एसआईआर (Voter List Re‑revision) के आरोपों को खारिज करने के लिए भाजपा ने एक विस्तृत जमीनी अभियान की घोषणा की है। अगले हफ्ते से सांसद, विधायक और बूथ स्तर के कार्यकर्ता 24 पन्नों के डॉकेट के साथ जनता के बीच जाकर मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को समझाएंगे।
डॉकेट में प्रमुख बिंदु
- 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कटने के दावे का जवाब – ड्राफ्ट रोल में ASDD (अस्थायी, स्थायी, डुप्लिकेट) श्रेणी में चिह्नित नाम और अंतिम सूची में कटे नामों में अंतर बताया गया।
- फॉर्म‑6 और ECINET से जुड़े सवालों के उत्तर – फॉर्म‑6 में कोई बदलाव नहीं, बल्कि डिक्लेरेशन फॉर्म को प्रक्रिया के साथ जोड़ा गया।
- मतदाता सूची का डेटाबेस राज्यवार विकेंद्रीकृत है; नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय ERO (Election Registration Officer) द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
- नए Gen‑Z मतदाताओं की वैधता – चुनाव आयोग के दस्तावेज़ में 2.37 करोड़ नए युवा मतदाताओं के जुड़ने का आंकड़ा दिया गया है, जो फॉर्म‑6 के माध्यम से नाम जोड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश और चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हवाला – भाजपा इस बात पर ज़ोर देती है कि SIR की कानूनी वैधता स्थापित है।
मुख्य बातें
- अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देना है।
- सांसद, विधायक और बूथ कार्यकर्ता अगले हफ्ते से विभिन्न क्षेत्रों में जनता को SIR की प्रक्रिया समझाएंगे।
- डॉकेट में 24 पन्नों में फॉर्म‑6, ECINET, ASDD श्रेणी और नए Gen‑Z मतदाताओं से जुड़ी जानकारी सम्मिलित है।
- भाजपा के सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी के इस मुद्दे को सत्ता परिवर्तन के साधन के रूप में खारिज किया।
भाजपा के नेताओं की टिप्पणी
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी और उनके साथियों का असली मकसद SIR मुद्दे से जुड़ा नहीं है, बल्कि सत्ता परिवर्तन करना है। उन्होंने कहा, “जब से राहुल गांधी उनके नेता बने हैं, तब से उन्होंने एक भी चुनाव नहीं जीता। कांग्रेस सालों से सत्ता से बाहर है, लेकिन वे सरकार बदलने निकले हैं।”
अभियान की संभावित प्रभावशीलता
डॉकेट में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर भाजपा का लक्ष्य जनता को यह भरोसा दिलाना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। यदि यह जमीनी अभियान सफल होता है, तो यह आगामी चुनावों में भाजपा को मतदाता आधार को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।
संबंधित रिपोर्ट
इस अभियान के साथ ही चुनाव आयोग ने भी SSR (Special Summary Revision) को 17 राज्यों में शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें यूपी भी शामिल है। यह पहल मतदाता सूची की सटीकता को और अधिक बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।




टिप्पणियाँ
0