बिजनौर के बढ़ापुर थाने के SHO को सरकारी WhatsApp ग्रुप में अश्लील वीडियो पोस्ट करने पर सस्पेंड
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में बढ़ापुर थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) नीरज तोमर को पुलिस के आधिकारिक और गोपनीय WhatsApp ग्रुप में एक आपत्तिजनक (अश्लील) वीडियो पोस्ट करने के बाद सस्पेंड कर दिया गया। यह घटना लगभग पाँच दिन पहले हुई, जब तोमर ने 1 मिनट 13 सेकेंड का वीडियो ग्रुप में साझा किया।
घटना की पृष्ठभूमि
बढ़ापुर थाने का आधिकारिक WhatsApp ग्रुप केवल विभागीय संचार और कार्य संबंधी जानकारी के लिये उपयोग किया जाता है। तोमर ने इस ग्रुप में महिला‑पुरुष का अश्लील वीडियो डाल दिया, जिससे कई सहकर्मियों ने वीडियो डाउनलोड कर स्क्रीनशॉट ले लिये। तोमर ने गलती का अहसास होते ही वीडियो को तुरंत डिलीट कर दिया, परन्तु पहले ही डाउनलोड किए गये सामग्री का प्रसार हो चुका था।
तुरंत कार्रवाई और जांच
बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अनुशासनहीनता और पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने के आरोप में सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने एक गोपनीय और निष्पक्ष जांच का आदेश दिया। सोमवार रात जांच टीम बढ़ापुर थाने पहुंची, जहाँ ग्रुप में जुड़े सभी पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गई और उनके बयानों को दर्ज किया गया। तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद रिपोर्ट में नीरज तोमर को दोषी पाया गया।
सस्पेंड और नई नियुक्ति
जांच रिपोर्ट की पुष्टि के बाद, एसपी बिश्नोई ने नीरज तोमर को तुरंत निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में इस तरह का गैर‑जिम्मेदाराना आचरण और घोर लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निलंबन के बाद, एसपी ने पुलिस की सोशल मीडिया सेल के प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मेंद्र कुमार को बढ़ापुर थाने का नया थानाध्यक्ष नियुक्त कर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए।
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मुख्य बातें
- बढ़ापुर थाने के SHO नीरज तोमर ने आधिकारिक WhatsApp ग्रुप में 1 मिनट 13 सेकेंड का अश्लील वीडियो पोस्ट किया।
- वीडियो को तुरंत डिलीट किया गया, परन्तु कई सहकर्मियों ने उसे डाउनलोड कर स्क्रीनशॉट ले लिये।
- एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने गोपनीय जांच का आदेश दिया और सोमवार रात जांच टीम ने थाने में पूछताछ की।
- जांच रिपोर्ट में तोमर को दोषी पाया गया और उसे सस्पेंड कर दिया गया।
- उपनिरीक्षक धर्मेंद्र कुमार को नया थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
यह मामला पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और डिजिटल संचार के नियमों की कड़ाई से पालन की आवश्यकता को उजागर करता है। अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की, जिससे भविष्य में इसी प्रकार की लापरवाही को रोकने की आशा है।




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