बिहार में NEET छात्रा मौत केस: 8 महीने की CBI जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट, कोई ठोस सबूत नहीं
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पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही 19 वर्षीय छात्रा की रहस्यमय मौत के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आठ महीने की विस्तृत जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की। यह रिपोर्ट यह दर्शाती है कि अब तक किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं।
केस की पृष्ठभूमि
जुड़ाव की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को हुई, जब छात्रा हॉस्टल में बेहोश पाई गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ 11 जनवरी को उसकी मृत्यु हो गई। पिता के बयान के बाद 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें शरीर पर चोट के निशान और संभावित यौन हिंसा का उल्लेख था।
जांच की प्रमुख घटनाएँ
- पोलिस ने प्रारंभिक पोस्ट‑मार्टम और फॉरेंसिक जांच की, जिससे यौन हिंसा की आशंका उत्पन्न हुई।
- कपड़ों से स्पर्म के साक्ष्य मिलने के बाद DNA प्रोफाइलिंग शुरू हुई।
- बिहार पुलिस ने मामले को CBI को सौंपने की अनुशंसा की; 12 फरवरी को CBI ने केस टेक‑ओवर किया।
- CBI ने हॉस्टल, कमरे, दस्तावेज़, कपड़े आदि की विस्तृत तलाशी ली और कई व्यक्तियों से पूछताछ की।
DNA परीक्षण
जांच के दौरान लगभग 30 व्यक्तियों के DNA सैंपल लिये गये। इन सैंपलों की तुलना छात्रा के कपड़ों से मिले जैविक साक्ष्य से की गई, परंतु किसी भी सैंपल में मिलान नहीं मिला। इस प्रकार वह प्रमुख साक्ष्य जो संभावित आरोपी की पहचान कर सकता था, वह भी निष्फल रहा।
हॉस्टल मालिक और अन्य संदिग्ध
हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, परंतु बिहार पुलिस की SIT और बाद में CBI दोनों ने उसके खिलाफ कोई आरोपपत्र नहीं दाखिल किया। परिणामस्वरूप उसे जमानत मिल गई।
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परिवार का बयान और अदालत की भूमिका
विशेष पॉक्सो अदालत ने छात्रा की मां का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसे CBI ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। यह याचिका अभी लंबित है। क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित है, जहाँ पीड़ित परिवार का पक्ष भी सुना जाएगा।
मुख्य बातें
- CBI ने 8 महीने की जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
- 30 DNA टेस्टों में किसी भी व्यक्ति का DNA मिलान नहीं हुआ।
- हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार किया गया, पर चार्जशीट नहीं बन पाई।
- मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी; अदालत क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करेगी या आगे जांच का आदेश देगी, यह तय करेगी।
- छात्रा के शरीर पर चोट और खरोंच के निशान, तथा कपड़ों पर मिले स्पर्म के स्रोत अभी भी अनसुलझे हैं।
आगे की संभावनाएँ
क्लोजर रिपोर्ट के बाद भी कई प्रश्न अनुत्तरित रह गये हैं। अदालत की सुनवाई में यदि रिपोर्ट को अस्वीकार किया जाता है तो CBI को पुनः जांच करने का निर्देश मिल सकता है। अन्यथा, केस बंद माना जाएगा और परिवार को न्याय की तलाश में अन्य कानूनी उपाय अपनाने पड़ सकते हैं।
यह मामला बिहार में पहले भी हुए अनसुलझे रहस्यमय मौतों, जैसे शिल्पी जैन/बॉबी कांड, की याद दिलाता है, जहाँ कई वर्षों बाद भी पूरी तरह से सच्चाई सामने नहीं आई।




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