भारत‑न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू: 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना, 20 अरब डॉलर का निवेश लक्ष्य
3 मिनट में पढ़ें

दशहरे के शुभ अवसर पर भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आज, 20 अक्टूबर से लागू हो गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक दोगुना कर 35 हज़ार करोड़ रुपये (लगभग 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है, जिसके लिए वार्षिक 18 % की चक्रवृद्धि वृद्धि दर आवश्यक होगी।
मुख्य बातें
- FTA के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में 100 % ड्यूटी‑फ्री पहुंच मिलेगी।
- कपड़ा, परिधान, चमड़ा, फुटवियर जैसे श्रम‑प्रधान सेक्टरों पर 10 % तक टैरिफ़ समाप्त होगा।
- इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, केमिकल्स और कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी।
- अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश आने की उम्मीद, मुख्यतः मैन्युफैक्चरिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृषि और इनोवेशन क्षेत्रों में।
- न्यूज़ीलैंड के शहद, सेब, कीवी, मिल्क एल्बुमिन, वाइन, फार्मास्यूटिकल्स, पॉलिमर और एल्युमिनियम पर टैरिफ़ में कटौती।
- भारतीय छात्रों को गारंटीड वर्क वीजा, 48 घंटे में कार्गो कस्टम क्लियरेंस, 24 घंटे में पेरिशेबल सामान की क्लियरेंस।
- कृषि सहयोग में सटीक खेती, प्रिसीजन एग्रीकल्चर और तकनीकी साझेदारी शामिल।
- डेयरी, प्याज, चीनी, चना, मटर, मक्का, बादाम, वसा‑तेल, जेम्स‑ज्वैलरी, एल्युमिनियम, तांबा, हथियार आदि को समझौते से बाहर रखा गया।
व्यापारिक अवसरों का विस्तार
समझौते के तहत कपड़ा, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम‑प्रधान सेक्टरों पर 10 % तक टैरिफ़ समाप्त हो जाएगा, जिससे MSMEs, महिला उद्यमियों और कारीगरों को निर्यात में नई संभावनाएँ मिलेंगी। इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, केमिकल्स और कृषि उत्पादों को भी न्यूज़ीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि यह समझौता प्रमुख निर्यात सेक्टरों के लिए नई संभावनाएँ पैदा करेगा और भारत को न्यूज़ीलैंड के मौजूदा निर्यात के 95 % हिस्से का टैरिफ़ मुक्त लाभ मिलेगा।
कृषि सहयोग और किसानों की सुरक्षा
भारत के कृषि मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारतीय किसानों को फलों, सब्जियों, मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए व्यापक बाजार पहुंच मिलेगी। साथ ही, टैरिफ‑रेट कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य और अन्य सुरक्षा उपायों के माध्यम से न्यूज़ीलैंड के सेब, कीवी और मनुका शहद के लिए संतुलित बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। समझौते के हिस्से के रूप में दोनों देशों ने कृषि उत्पादकता साझेदारी शुरू करने का संकल्प लिया है, जिसमें सटीक खेती, प्रिसीजन एग्रीकल्चर और तकनीकी सहयोग शामिल होगा।
शिक्षा और वर्क वीजा सुविधाएँ
शिक्षा के लिए न्यूज़ीलैंड जाने वाले भारतीय छात्रों को अब गारंटीड वर्क वीजा मिलेगा, जिससे वे निर्धारित अवधि में प्रशिक्षण और काम कर सकेंगे। यह पहल छात्रों को अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ दोनों देशों के मानव संसाधन आदान‑प्रदान को भी सुदृढ़ करेगी।
आपके लिए संबंधित खबरें
कस्टम क्लियरेंस में तेज़ी
FTA के तहत कार्गो के लिए 48 घंटे के भीतर और पेरिशेबल सामान के लिए 24 घंटे के भीतर कस्टम क्लियरेंस की सुविधा होगी। डिजिटल सर्टिफिकेशन और रूल्स‑ऑफ़‑ऑरिजिन के सेल्फ‑सर्टिफिकेशन से प्रक्रिया में देरी और अनुपालन लागत कम होगी।
बाजार में बाहर रखे गए उत्पाद
भारत ने डेयरी उत्पाद, प्याज, चीनी, चना, मटर, मक्का, बादाम, विभिन्न वसा‑तेल, जेम्स‑ज्वैलरी, एल्युमिनियम, तांबा, हथियार और गोला‑बारूद को इस समझौते से बाहर रखा है, जिससे घरेलू उद्योगों की सुरक्षा बनी रहेगी।
आगे का रास्ता
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता केवल बाजार पहुंच के बारे में नहीं, बल्कि एक मजबूत और स्थायी आर्थिक साझेदारी बनाने के बारे में है। न्यूज़ीलैंड का 60‑70 % व्यापार एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में केंद्रित है, जहाँ कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की तुलना में अधिक मजबूत संबंध हैं। इस नई साझेदारी से दोनों देशों के बीच व्यापारिक बंधन और निवेश प्रवाह को और सुदृढ़ करने की उम्मीद है।




टिप्पणियाँ
0