बैतूल में खाटू श्याम यात्रा के शोक: कई परिवारों की अर्थी एक साथ, गांव में गहरा मातम
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मध्य प्रदेश के बैतूल में खाटू श्याम यात्रा के दौरान हुए सड़क हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जिससे गांव में गहरा मातम पसरा है। रविवार को शवों के अंतिम संस्कार के दौरान बाप‑बेटी, पति‑पत्नी की अर्थी एक साथ उठी, जिससे उपस्थित लोगों के आँसू रुक नहीं पाए।
हादसे की पृष्ठभूमि
बैतूल के मुलताई क्षेत्र के विभिन्न गांवों से खाटू श्याम दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु राजस्थान के रास्ते में एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुए। इस दुर्घटना में कई परिवारों के सदस्य मारे गए, जिनमें सहायक प्रबंधक, छात्र, शिक्षक और सामान्य ग्रामीण शामिल थे।
एक साथ उठी कई अर्थियां
शवों के गांव पहुंचते ही स्थानीय लोगों ने एकत्रित होकर अंतिम विदाई दी। कई परिवारों ने एक ही समय में अपनी अर्थी उठाई, जिससे शोक की लहर पूरे गांव में फैल गई।
- बाप‑बेटी की अर्थी: मुलताई क्षेत्र के खेड़ी रामोसी गांव में कृष्ण राव घोड़की (सहकारी बैंक में सहायक प्रबंधक) और उनकी 18‑वर्षीय बेटी त्रिशा की मृत्यु हुई। दोनों की चिता एक साथ सजाई गई और एक ही समय में अंतिम संस्कार किया गया।
- पति‑पत्नी की अर्थी: सिरखेड़ गांव के 68‑वर्षीय राजकुमार बोड़खे और उनकी 55‑वर्षीय पत्नी अनीता बोड़खे की भी इस दुर्घटना में मौत हुई। उनके शव भी एक साथ गांव में पहुंचे और एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार हुआ।
- शिक्षिका की विदाई: घाट बिरोली गांव की शिक्षिका अरुणाताई झरबड़े की भी इस हादसे में मृत्यु हुई। उनका अंतिम संस्कार वर्धा नदी के तट पर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति में किया गया।
परिवारों की भावनाएँ
गांव के लोगों ने बताया कि इस हादसे ने कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया है जो कभी भर नहीं पाएगा। कई घरों में रोते हुए परिवार के सदस्य अब भी शोक में डूबे हैं। “हमारी बेटी, पत्नी, पिता सब एक साथ नहीं रहे। यह दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता,” कुछ ग्रामीणों ने कहा।
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स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने दुर्घटना स्थल की जांच शुरू कर दी है और मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। साथ ही, भविष्य में ऐसी यात्राओं के दौरान सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
मुख्य बातें
- खाटू श्याम यात्रा के दौरान बैतूल में सड़क हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत।
- शवों के अंतिम संस्कार में बाप‑बेटी, पति‑पत्नी की अर्थी एक साथ उठी।
- कृष्ण राव घोड़की (सहायक प्रबंधक) और बेटी त्रिशा, राजकुमार बोड़खे और पत्नी अनीता बोड़खे, तथा शिक्षिका अरुणाताई झरबड़े की मृत्यु।
- स्थानीय लोगों ने शोक में रोते हुए अंतिम विदाई दी, गांव में गहरा मातम।
- स्थानीय प्रशासन ने जांच और आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया।
यह दुखद घटना धार्मिक यात्रा के दौरान सुरक्षा के महत्व को फिर से उजागर करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त उपायों की आवश्यकता पर बल देती है।




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