सपा नेता आज़म खान की ईडी गिरफ्तारी को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई इस हफ्ते
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सामाजिक और राजनीतिक मंच पर चर्चा का केंद्र बन चुके सपा नेता आज़म खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि जेल से रिहाई के केवल 40 मिनट बाद हुई गिरफ्तारी और उसके बाद जारी 14‑दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश कानूनी तौर पर अनुचित है। इस याचिका पर इस हफ्ते सुनवाई की संभावना जताई गई है।
पृष्ठभूमि
आज़म खान, जो मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के संस्थापक हैं, पर सरकारी धन के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। ईडी का दावा है कि ट्रस्ट ने सरकारी निर्माण कार्यों के ठेकेदारों से प्राप्त रकम का एक हिस्सा यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में निवेश किया, जबकि स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (LGDF) से लगभग 6.60 करोड़ रुपये के काम भी अनियमित रूप से किए गए।
जमानत और पुनः गिरफ्तारी
29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहरे पैन कार्ड मामले में आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को जमानत दी। 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहा होने के 40 मिनट बाद ईडी ने उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया, इस बार जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में।
विशेष PMLA अदालत का आदेश
एक नवंबर को ईडी ने आज़म खान को गाज़ियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। आज़म खान ने इस आदेश को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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सुप्रीम कोर्ट में याचिका
आज़म खान के वकील निज़ाम पाशा ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने याचिका दायर की। उन्होंने तुरंत सुनवाई की मांग की, जिस पर CJI ने याचिका को इस हफ्ते सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। सुनवाई में अदालत को दो मुख्य मुद्दों पर विचार करना होगा:
- रिहाई के तुरंत बाद हुई गिरफ्तारी की वैधता।
- विशेष PMLA अदालत द्वारा जारी 14‑दिन की न्यायिक हिरासत के आदेश की कानूनीता।
मुख्य बातें
- आज़म खान ने ईडी की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
- जमानत के 40 मिनट बाद ही पुनः गिरफ्तारी हुई।
- ईडी ने ट्रस्ट से जुड़े 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति को कथित अपराध से अर्जित माना।
- गाज़ियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने 14‑दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश दिया।
- वकील ने इस हफ्ते सुनवाई की मांग की, और CJI ने सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
आगे की संभावनाएँ
यदि सुप्रीम कोर्ट आज़म खान की याचिका को स्वीकार करती है, तो गिरफ्तारी को रद्द किया जा सकता है और न्यायिक हिरासत का आदेश भी निरस्त हो सकता है। दूसरी ओर, यदि अदालत याचिका को खारिज करती है, तो आज़म खान को वर्तमान में जारी 14‑दिन की हिरासत में रहना पड़ेगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के परिणाम से न केवल आज़म खान की व्यक्तिगत स्थिति, बल्कि राजनीतिक माहौल और ईडी की कार्यवाही पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा।




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