अयोध्या राम मंदिर में 1 नवंबर से बदलेंगे दर्शन-आरती के समय
2 मिनट में पढ़ें

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर प्रशासन ने 1 नवंबर से लागू होने वाली नई समय‑सारणी की घोषणा की है। मौसम में बदलाव को देखते हुए सुबह‑शाम के पूजा‑पाठ, आरती और दर्शन के समय में कई परिवर्तन किए गए हैं। इस बदलाव से श्रद्धालुओं को मंदिर के विभिन्न कार्यक्रमों का सही‑समय पालन करने में मदद मिलेगी।
नई समय‑सारणी का मुख्य बिंदु
- पट सुबह 4:00 बजे खुलेंगे (पहले 3:45 बजे)।
- मंगला आरती 4:30 बजे होगी।
- श्रृंगार आरती 6:30 बजे आयोजित होगी।
- धार्मिक दर्शन 7:00 बजे से शुरू।
- बालभोग 8:00‑8:10 बजे के बीच होगा; इस अवधि में पट बंद रहेगा।
- राजभोग 11:30‑12:00 बजे के बीच।
- रामलला का विश्राम 12:30‑13:30 बजे निर्धारित।
- दर्शन 13:35 बजे से पुनः शुरू।
- संध्या आरती 19:00 बजे।
- शयन आरती 21:30 बजे के बाद पट 22:00 बजे बंद। (पहले 22:30 बजे बंद होते थे)
समय‑सारणी का विस्तृत विवरण
निम्नलिखित तालिका में नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक कार्यक्रम का समय दर्शाया गया है:
- पट खुलना: 04:00 बजे
- मंगला आरती: 04:30 बजे
- श्रृंगार आरती: 06:30 बजे
- धार्मिक दर्शन: 07:00 बजे से
- बालभोग: 08:00‑08:10 बजे (पट बंद)
- राजभोग: 11:30‑12:00 बजे
- विश्राम: 12:30‑13:30 बजे
- दर्शन पुनः शुरू: 13:35 बजे
- संध्या आरती: 19:00 बजे
- शयन आरती: 21:30 बजे
- पट बंद: 22:00 बजे
श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुझाव
नए समय‑सारणी के अनुसार, श्रद्धालुओं को विशेष रूप से निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- दर्शन के शुरुआती समय (07:00‑08:00) में भीड़ अधिक हो सकती है, इसलिए समय से पहले पहुंचना उचित रहेगा।
- बालभोग के दौरान पट बंद रहेगा; इस अवधि में प्रवेश न करें। li>राजभोग और विश्राम के समय में मंदिर के भीतर शांति बनाए रखें।
- शयन आरती के बाद पट बंद होने से पहले मंदिर परिसर से बाहर निकलें, ताकि सुरक्षा नियमों का पालन हो सके।
परिवर्तन का कारण
मंदिर प्रशासन ने बताया कि ऋतु परिवर्तन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। नई समय‑सारणी से पूजा‑पाठ के क्रम में निरंतरता बनी रहेगी और भक्तों को उचित विश्राम एवं भोजन का समय मिलेगा।
आपके लिए संबंधित खबरें
निष्कर्ष
1 नवंबर से अयोध्या के राम मंदिर में लागू नई समय‑सारणी से दर्शन‑आरती के क्रम में स्पष्टता आएगी। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे इस नई तालिका के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि वे बिना किसी असुविधा के अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें।




टिप्पणियाँ
0