अंशुल कंबोज ने दिया आलोचकों को जवाब, कहा-एक खराब मैच करियर तय नहीं करता
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न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में हरियाणा के तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने शानदार प्रदर्शन कर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीता। यह उनका दूसरा ही वनडे मैच था, पर उन्होंने अपने 10 ओवर में 22 रन देकर 2 विकेट लिए और 46 डॉट गेंदें फेंकी, जिससे न्यूज़ीलैंड 185 रन पर ऑल‑आउट हो गया।
मैच का सारांश
ईडन पार्क में खेले गए इस मुकाबले में कंबोज ने मध्य ओवरों में लय तोड़ते हुए न्यूज़ीलैंड को स्कोर बनाने से रोका। उनके साथ अर्शदीप सिंह (4 विकेट) और गुरनूर बरार (3 विकेट) ने भी प्रभावी गेंदबाजी की, जिससे भारत ने 185 रन पर न्यूज़ीलैंड को सीमित किया।
कप्तान शुभमन गिल की प्रशंसा
मैच के बाद भारत के कप्तान शुभमन गिल ने कंबोज की तेज़ी और सीम मूवमेंट की सराहना की। उन्होंने कहा, “अंशुल ऐसे गेंदबाज हैं जो इन परिस्थितियों के लिए बिल्कुल सही हैं। वह हमेशा तेज होते हैं, गेंद को सीम कराने की कोशिश करते हैं और पुरानी गेंद से भी अच्छे हैं।” गिल ने यह भी बताया कि जब विकेट नहीं मिल रहे हों तो कंबोज अतिरिक्त उछाल पैदा कर सकते हैं।
कंबोज का खुद का बयान
25 साल के कंबोज ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य सही लेंथ पर गेंदबाजी करना था, न कि केवल विकेट लेने के पीछे भागना। उन्होंने कहा, “विकेट में थोड़ी सीम मूवमेंट थी, पर सतह से कुछ हासिल करने के लिए अच्छी लेंथ पर गेंदबाजी करना भी जरूरी था। अगर आप अपनी लेंथ चूक जाते हैं तो रन पड़ सकते हैं।”
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कंबोज ने यह भी कहा कि एक खराब मैच खिलाड़ी के करियर को परिभाषित नहीं करता। उन्होंने कहा, “एक खराब मैच आपके करियर को तय नहीं करता या यह नहीं बताता कि आप अच्छे या बुरे खिलाड़ी हैं। मैं शुरुआत से वही चीजें कर रहा हूँ, और मैं अभी भी वही कर रहा हूँ। इसलिए, एक खराब मैच ने मुझे ज्यादा प्रभावित नहीं किया। इसने मुझे बेहतर करने, सुधार करने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।”
मुख्य बातें
- अंशुल कंबोज ने अपने दूसरे वनडे में 10 ओवर में 22 रन और 2 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द मैच जीता।
- कंबोज ने 46 डॉट गेंदें फेंकी, जिससे न्यूज़ीलैंड 185 रन पर ऑल‑आउट हो गया।
- कप्तान शुभमन गिल ने कंबोज की तेज़ी और सीम मूवमेंट की प्रशंसा की।
- कंबोज ने कहा कि एक खराब मैच करियर तय नहीं करता, यह केवल एक सीख है।
अंशुल कंबोज का यह प्रदर्शन उनके महंगे वनडे डेब्यू के बाद आया है, पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि एक ही मैच से खिलाड़ी का मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए। उनका यह विचार युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है, जो निरंतर सुधार और मेहनत के साथ अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं।




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