उत्तराखंड में फिर खुला कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी, मानसून के बाद पर्यटकों की आवाज़ी
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उत्तरीाखंड के रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत स्थित कालाढूंगी में कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी मानसून के बाद फिर से खुली है। बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने और सुरक्षा कारणों से 30 जून को बंद की गई यह इको‑टूरिज्म जोन अब पर्यटकों को जिम कॉर्बेट की ऐतिहासिक विरासत, वन्यजीव और कुमाऊँनी संस्कृति का निकट से अनुभव कराता है।
सफारी का पुनः उद्घाटन और प्रारंभिक प्रतिक्रिया
बारिश के मौसम में सुरक्षा कारणों से बंद की गई सफारी, मानसून के बाद दोबारा संचालन के पहले दिन शाम की पाली में पर्यटकों की भीड़ देखी गई। स्थानीय मीडिया ने बताया कि इस जोन के खुलने से कालाढूंगी और कोटाबाग क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
जंगल सफारी की विशेषताएँ
कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी केवल जंगल में घूमने तक सीमित नहीं है। यहाँ के नेचर गाइड पर्यटकों को जिम कॉर्बेट के जीवन, उनके संरक्षण संबंधी योगदान और क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर के बारे में विस्तृत जानकारी देते हैं। सफारी के दौरान वन्यजीवों की जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और कुमाऊँनी संस्कृति के बारे में भी बताया जाता है, जिससे यात्रा यादगार बनती है।
इको‑टूरिज्म से स्थानीय रोजगार
सफारी जोन की शुरुआत को दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन यह इको‑टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन चुका है। यहाँ नेचर गाइड, स्थानीय होमस्टे, ग्रामीणों द्वारा निर्मित स्मृति चिह्न, कुमाऊँनी खानपान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बच्चों के लिए नेचर एजुकेशन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है। वरिष्ठ नेचर गाइड मोहन पांडे के अनुसार, एक पर्यटक के आगमन से लगभग दस लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना बनती है। वन विभाग का सहयोग इस पहल को सुदृढ़ बनाता है।
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पर्यटन के साथ सतत विकास की दिशा
सफारी के पुनः खुलने से न केवल पर्यटन कारोबार को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय आजीविका में भी सुधार की उम्मीद है। कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए स्थानीय लोगों को आर्थिक अवसर प्रदान करना है। यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो वन्यजीव संरक्षण और इको‑टूरिज्म दोनों को स्थायी लाभ मिलेगा।
मुख्य बातें
- कालाढूंगी में कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी मानसून के बाद दोबारा खुली।
- सुरक्षा कारणों से 30 जून को बंद की गई थी, अब शाम की पाली में संचालन शुरू।
- सफारी में जिम कॉर्बेट की विरासत, वन्यजीव और कुमाऊँनी संस्कृति की जानकारी दी जाती है।
- स्थानीय लोगों को नेचर गाइड, होमस्टे, स्मृति चिह्न निर्माण आदि के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
- एक पर्यटक के आगमन से लगभग दस लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना।
- सफारी के पुनः खुलने से कालाढूंगी‑कोटाबाग क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद।




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