पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदलने का मामला: कांग्रेस ने उठाए गंभीर आरोप
3 मिनट में पढ़ें

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव का आरोप कांग्रेस ने लगाया, जिसमें 13,150 वोटरों के नाम और पिता का नाम बदला गया, 804 नाम हटाए गए और 2,600 नए नाम जोड़े गए। यह मामला 13 अक्टूबर को सामने आया और चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को हटाया तथा पूरे उत्तर प्रदेश में समान गड़बड़ियों की जांच का आदेश दिया।
कांग्रेस के आरोप और कुमुद गंगवार की जांच
कांग्रेस के दावेदार कुमुद गंगवार ने बताया कि उन्होंने पीलीभीत के 419 बूथों की वोटर लिस्ट की पूरी जाँच की। 53 लोगों की टीम ने 96 घंटे में 3,48,937 मतदाताओं के EPIC नंबरों की तुलना की। इस पड़ताल में कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी तीन प्रकार की विसंगतियां सामने आईं:
- नाम बदलना: 13,150 वोटरों के EPIC नंबर और क्रमांक वही रहे, पर नाम और पिता का नाम बदल गया। सभी प्रभावित मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं।
- नाम हटाना: 804 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जबकि उन्होंने फॉर्म‑7 या फॉर्म‑8 के माध्यम से कोई आवेदन नहीं किया था।
- नए नाम जोड़ना: लगभग 2,600 नए नाम जोड़े गए, जिनमें कई मामलों में वास्तविकता की पुष्टि नहीं हो पाई।
विवरणात्मक उदाहरण
गंगवार ने बताया कि 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में वही EPIC नंबर पर सही नाम दर्ज था, पर बाद में 2 सितंबर 2026 को रात 9:26 बजे नाम बदलने का रिकॉर्ड मिला। कुछ मामलों में मोबाइल नंबर के अंतिम चार अंक भी बदले हुए दिखे।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
उत्तरी प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 21 अक्टूबर की देर रात घोषणा की कि पीलीभीत में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर ERO और मतदाता पंजीकरण केंद्र के ऑपरेटर को मतदाता सूची के काम से हटा दिया गया। दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया और संभावित मुकदमे की कार्रवाई की बात कही गई। साथ ही, सभी जिलों में समान विसंगतियों की जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया।
आपके लिए संबंधित खबरें
कांग्रेस की कानूनी कार्रवाई की तैयारी
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर एसडीएम, जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तहरीर दी है। यदि पुलिस कार्रवाई नहीं होती, तो मामला सत्र न्यायालय और फिर हाईकोर्ट तक ले जाने का इरादा बताया गया। पार्टी ने फॉर्म‑8 और अन्य दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बदलाव किसके आवेदन पर किए गए।
मुख्य बातें
- पीलीभीत सदर में 13,150 वोटरों के नाम और पिता का नाम बदला गया, जबकि EPIC नंबर वही रहा।
- 804 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, बिना किसी आधिकारिक आवेदन के।
- लगभग 2,600 नए नाम जोड़े गए, जिनमें से कई की वास्तविकता पर सवाल।
- कांग्रेस ने 53 लोगों की टीम बनाकर 96 घंटे में 3,48,937 EPIC नंबरों की जाँच की।
- चुनाव आयोग ने संबंधित अधिकारियों को हटाया और पूरे उत्तर प्रदेश में समान गड़बड़ियों की जांच का आदेश दिया।
- कांग्रेस ने कानूनी कार्रवाई की तैयारी की और फॉर्म‑8 दस्तावेजों की सार्वजनिकता की मांग की।
यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जिससे मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आगे की जांच के परिणाम और संभावित न्यायिक कदम इस चुनावी माहौल को और जटिल बना सकते हैं।




टिप्पणियाँ
0