HDFC Bank की दूसरी तिमाही में शुद्ध लाभ में 5.55% की बढ़ोतरी, नेट प्रॉफिट पहुंचा ₹20,700 करोड़
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भारत के सबसे बड़े निजी लेंडर HDFC Bank ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (जुलाई‑सितंबर) में शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। बैंक ने बताया कि इस तिमाही का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 5.55 प्रतिशत बढ़कर ₹20,700 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह ₹19,611 करोड़ था।
मुख्य वित्तीय आंकड़े
- कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट: ₹20,700 करोड़ (5.55% YoY वृद्धि)
- स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट: ₹19,510 करोड़ (4.7% YoY वृद्धि)
- कुल आय: ₹97,258 करोड़ (पिछले वर्ष ₹91,040 करोड़ से बढ़ी)
- कुल खर्च: ₹67,774 करोड़ (पिछले वर्ष ₹63,117 करोड़ से बढ़े)
- प्रोविजन एवं आकस्मिक खर्च: ₹3,573.62 करोड़ (पिछले वर्ष ₹3,500 करोड़ से बढ़े)
- टैक्स‑बाद मुनाफा: वार्षिक आधार पर 12.6% वृद्धि
संपत्ति और पूँजी की स्थिति
ग्रॉस नॉन‑परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) रेशियो में सुधार हुआ, जो एक तिमाही पहले के 1.17% और पिछले वर्ष की 1.24% से घटकर 1.11% पर आ गया। 30 सितंबर 2026 तक कुल कैपिटल एडिक्वेसी 18.9% रही, जबकि एक साल पहले यह 20% थी। बैलेंस शीट का आकार 45.78 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा, जो 30 सितंबर 2025 के 40.03 लाख करोड़ रुपए से बढ़ा।
जमा (Deposits) में वृद्धि
- औसत जमा राशि: ₹31.66 लाख करोड़ (वर्ष‑दर‑वर्ष 16.8% वृद्धि)
- पिछली तिमाही (जून‑2026) की तुलना में 5.1% वृद्धि
- औसत CASA जमा: ₹9.71 लाख करोड़ (वर्ष‑दर‑वर्ष 10.7% वृद्धि)
- पिछली तिमाही की तुलना में 1.5% वृद्धि
अग्रिम (Advances) में विस्तार
औसत अग्रिम राशि (इंटर‑बैंक पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट, बिल री‑डिस्काउंटिंग, सिक्युरिटाइजेशन/असाइनमेंट सहित) 31.87 लाख करोड़ रुपए तक पहुंची। यह पिछले वर्ष की तिमाही (सितंबर‑2025) की ₹27.95 लाख करोड़ और जून‑2026 की ₹30.39 लाख करोड़ से क्रमशः 14.1% और 4.9% बढ़ी।
मुख्य बातें
- HDFC Bank ने Q2 FY2027 में नेट प्रॉफिट ₹20,700 करोड़ दर्ज किया।
- शुद्ध लाभ में YoY वृद्धि 5.55% और स्टैंडअलोन लाभ में 4.7%।
- कुल आय ₹97,258 करोड़, खर्च ₹67,774 करोड़।
- ग्रॉस NPA रेशियो 1.11% तक घटा, पूँजी पर्याप्तता 18.9%।
- औसत जमा ₹31.66 लाख करोड़, CASA जमा ₹9.71 लाख करोड़।
- औसत अग्रिम ₹31.87 लाख करोड़, सालाना 14.1% वृद्धि।
बैंक ने बताया कि इन परिणामों से उसकी वित्तीय स्थिति में स्थिरता और वृद्धि दोनों का संकेत मिलता है, विशेषकर जमा और अग्रिम में मजबूत वृद्धि, साथ ही NPA रेशियो में सुधार। यह प्रदर्शन भारतीय निजी बैंकिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।



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