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सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वच्छता निर्देशों की अवहेलना पर राज्यों को अवमानना नोटिस की चेतावनी

2 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 17 Oct 2026• अपडेट 16 Oct 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वच्छता निर्देशों की अवहेलना पर राज्यों को अवमानना नोटिस की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मासिक धर्म स्वास्थ्य निर्देशों के पालन में जानकारी न देने पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी, अगली सुनवाई 14 दिसंबर तय।

सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वच्छता को मौलिक अधिकार मानते हुए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशों के पालन की जानकारी न देने पर कड़ी चेतावनी जारी की। कोर्ट ने कहा कि यदि आवश्यक जानकारी नहीं दी गई तो अवमानना नोटिस जारी किया जाएगा।

निर्देशों का पालन न करने पर संभावित कार्रवाई

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सवाल किया कि कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्र सरकार द्वारा मांगी गई जानकारी क्यों नहीं दी। बेंच ने कहा कि यदि राज्य मुख्य सचिवों ने मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़े फैसले को लागू करने के कदमों की जानकारी नहीं दी, तो उन्हें अवमानना कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

केंद्र सरकार की भूमिका

कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह 1 सितंबर को जारी आदेश में उल्लेखित विशेष निर्देशों पर ध्यान देते हुए, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिखित जानकारी मांगे। इसके लिए केंद्र एक प्रश्नावली तैयार कर सकता है और उत्तरों की मांग कर सकता है।

अगली सुनवाई की तिथि

इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को निर्धारित की गई है। बेंच ने भरोसा जताया कि केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने मासिक धर्म स्वच्छता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार मानने के महत्व को समझ लिया है।

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मासिक धर्म स्वच्छता को मौलिक अधिकार घोषित करने का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमने मासिक धर्म स्वच्छता/स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 का एक हिस्सा घोषित किया है।” बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि यह फैसला केवल कागज़ पर ही रह गया, तो दूर‑दराज़ क्षेत्रों में पढ़ाई छोड़ने वाली लड़कियों के हित में इसका कोई असर नहीं होगा।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य निर्देशों के पालन में जानकारी न देने पर राज्यों को अवमानना नोटिस की चेतावनी दी।
  • जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने केंद्र सरकार को 1 सितंबर के आदेश के विशेष निर्देशों पर ध्यान देने का निर्देश दिया।
  • केंद्र एक प्रश्नावली तैयार कर सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से लिखित जवाब मांग सकता है।
  • अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
  • कोर्ट ने मासिक धर्म स्वच्छता को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया।
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