हरीश साल्वे ने कहा: CJI हर मामले की सुनवाई नहीं करते, कांग्रेस के वकीलों को यह बताना चाहिए
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पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने न्यायपालिका और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों के लगातार हमलों पर तीखा तंज किया। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस (CJI) व्यक्तिगत रूप से हर मामले की सुनवाई नहीं करते और कांग्रेस के सीनियर वकीलों को यह बात नेताओं को बतानी चाहिए।
विरोधी दलों के प्रदर्शन पर साल्वे का बयान
साल्वे ने बताया कि विपक्षी दलों का विरोध-प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ चल रहा है, जो मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को लेकर है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आलोचना का अधिकार है, परन्तु इसे “उचित सीमाओं” के भीतर रखना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना नहीं बनाना चाहिए।
संवैधानिक संस्थाओं पर हमले का असर
साल्वे ने चेतावनी दी कि संस्थागत ढांचे को कमजोर करने वाले हमले देश के लोकतांत्रिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राजनीति अपनी उचित सीमाओं से थोड़ी आगे बढ़ रही है।”
चीफ जस्टिस की कार्यशैली पर स्पष्टीकरण
साल्वे ने स्पष्ट किया कि चीफ जस्टिस व्यक्तिगत रूप से हर मामले की सुनवाई नहीं करते। उन्होंने कहा, “क्या कांग्रेस में इतने सीनियर वकील हैं कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि CJI हर मामले की सुनवाई नहीं करते?” यह टिप्पणी एक रिपोर्ट के बाद आई, जिसने CJI के व्यक्तिगत सुनवाई न करने को लेकर विवाद खड़ा किया था।
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तीन सदस्यीय पैनल की प्रक्रिया
साल्वे ने तीन सदस्यीय पैनल के कामकाज पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि पैनल में दो सदस्य असहमत हों और तीसरा सर्वसम्मति का दावा करे, तो असहमत सदस्य को असहमति दर्ज करनी चाहिए, न कि निर्णय को सर्वसम्मति मान लेना चाहिए।
व्यापारियों और जनता की चिंताएँ
साल्वे ने यह भी कहा कि लगातार हंगामे और विरोध प्रदर्शन दिल्ली के लोगों को परेशान कर रहे हैं, विशेषकर त्योहारों के मौसम में जहाँ दुकानदारों को व्यापार पर असर का डर है।
मुख्य बातें
- हरीश साल्वे ने कहा कि CJI व्यक्तिगत रूप से हर मामले की सुनवाई नहीं करते।
- विपक्षी दलों का विरोध-प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ है, जो SIR को लेकर है।
- संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
- तीन सदस्यीय पैनल में असहमति को दर्ज करना आवश्यक है, सर्वसम्मति नहीं माननी चाहिए।
- विरोधी प्रदर्शन से दिल्ली के व्यापारियों को आर्थिक नुकसान का डर है।




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