नीम-हकीम की सलाह पर बवासीर के इलाज में पत्थर फँसा, जान बची ऑपरेशन से
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कानपुर में एक चौंकाने वाली घटना ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनियंत्रित उपचार के खतरों को उजागर किया। एक व्यक्ति ने बवासीर (पाइल्स) के इलाज के लिए नीम-हकीम की सलाह पर रोज़ाना डेढ़ किलो वजन वाले गोल पत्थर से सिंकाई की, लेकिन एक दिन वह पत्थर अचानक उसके शरीर के अंदर फँस गया। कई घंटे की सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने पत्थर निकाल कर उसकी जान बचाई।
घटना की पृष्ठभूमि
पीड़ित ने बताया कि उसे बवासीर की समस्या थी और वह स्थानीय नीम-हकीम की सलाह पर उपचार कर रहा था। हकीम ने उसे एक गोल, लगभग डेढ़ किलो वजन वाला पत्थर दिया, जिसे वह कई दिनों से रोज़ाना अपनी बवासीर पर रगड़ता रहा। एक दिन पत्थर उसके हाथ से फिसल कर शरीर के अंदर प्रवेश कर गया, जिससे उसे तीव्र दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई महसूस होने लगी।
अस्पताल में भर्ती और निदान
दर्द के कारण पीड़ित ने स्वयं ही अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने प्रारम्भिक जांच में उसकी समस्या को समझ नहीं पाया, इसलिए एक्स‑रे करवाया गया। इमेजिंग से स्पष्ट हुआ कि पत्थर शरीर के अंदर फँसा हुआ है। डॉक्टरों ने तुरंत सर्जिकल हस्तक्षेप की योजना बनाई।
ऑपरेशन और परिणाम
डॉ. प्रशांत कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सर्जन टीम ने कई घंटे की जटिल सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान पत्थर को सुरक्षित रूप से निकालने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि वह लगभग डेढ़ किलो वजन का था और शरीर के अंदर गहराई में स्थित था। अंततः पत्थर सफलतापूर्वक निकाला गया और मरीज को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा होता तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
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डॉक्टरों की चेतावनी
डॉ. प्रशांत कुमार ने इस घटना को एक चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “बिना प्रमाणित चिकित्सा सलाह के पारम्परिक उपचार, विशेषकर भारी वस्तुओं का उपयोग, अत्यधिक जोखिमपूर्ण हो सकता है। बवासीर जैसी आम बीमारी के लिए डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी अनजानी प्रक्रियाएँ न केवल रोग को बढ़ा सकती हैं, बल्कि जीवन‑धमकी भी बन सकती हैं।
मुख्य बातें
- कानपुर में बवासीर के इलाज के लिए नीम-हकीम ने 1.5 किलोग्राम का पत्थर दिया।
- पत्थर अचानक शरीर के अंदर फँस गया, जिससे तीव्र दर्द और चलने‑फिरने में कठिनाई हुई।
- डॉक्टरों ने एक्स‑रे से स्थिति का पता लगाया और कई घंटे की सर्जरी के बाद पत्थर निकाला।
- डॉ. प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की जान खतरे में पड़ सकती थी।
- डॉक्टरों ने पारम्परिक उपचार के बिना प्रमाणित चिकित्सा सलाह लेने की सलाह दी।
यह घटना स्वास्थ्य‑सुरक्षा के महत्व को दोहराती है और अनियंत्रित उपचार के संभावित खतरों को उजागर करती है। बवासीर जैसी सामान्य बीमारियों के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करना ही सुरक्षित उपाय है।




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