IIM बेंगलुरु ने मिडटर्म परीक्षा में लिखित पेपर की जगह AI चैटबॉट बनाने का नया तरीका अपनाया
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भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु (IIM Bangalore) ने जून‑जुलाई 2026 के सत्र में अपने मिडटर्म मूल्यांकन के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। पारंपरिक लिखित परीक्षा की जगह छात्रों को अपना AI चैटबॉट बनाकर परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर तैयार करने का कार्य दिया गया। इस प्रयोग में 78 बिजनेस एनालिटिक्स और सामान्य MBA के ऑप्शनल कोर्स के छात्रों ने भाग लिया।
परीक्षा का नया स्वरूप
परम्परागत कागज‑कलम की परीक्षा को बदलते हुए, छात्रों को चैटबॉट को सही निर्देश (प्रॉम्प्ट) देने, कोर्स से संबंधित सामग्री अपलोड करने और विभिन्न संस्करण बनाकर उनके उत्तरों की गुणवत्ता को परखने का काम सौंपा गया। इस प्रक्रिया में छात्रों की याददाश्त के साथ‑साथ AI टूल को प्रभावी ढंग से उपयोग करने की प्रैक्टिकल क्षमता का भी मूल्यांकन किया गया।
प्रश्नों की संख्या और प्रकार
मिडटर्म एग्जाम में कुल 15 प्रश्न शामिल थे। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर छात्र अपने विकसित चैटबॉट की मदद से तैयार करता था। सही प्रॉम्प्ट लिखना, आवश्यक जानकारी देना और चैटबॉट को निरंतर सुधारना इस मूल्यांकन के मुख्य मानदंड थे।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का विकास
इस मूल्यांकन की रूपरेखा IIM बेंगलुरु के निर्णय‑साइंस प्रोफेसर सुभब्रत मजूमदार ने तैयार की। उन्होंने वर्सेल (Vercel) पर संचालित एक विशेष डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया, जिसमें AI‑आधारित कोडिंग टूल्स का उपयोग किया गया। प्रत्येक छात्र को इस प्लेटफ़ॉर्म पर व्यक्तिगत प्रवेश दिया गया, जहाँ वे अपना चैटबॉट बना, परीक्षण कर और अंतिम रूप दे सकते थे। इस व्यवस्था से कोडिंग में कमजोर छात्रों को भी सक्रिय भागीदारी का अवसर मिला।
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मानवीय मूल्यांकन
हालांकि उत्तर तैयार करने में AI का उपयोग किया गया, लेकिन अंतिम मूल्यांकन एक टीचिंग असिस्टेंट द्वारा किया गया। इस तरह AI‑सहायता प्राप्त उत्तरों की जाँच में मानवीय भूमिका बनी रही, जिससे तकनीकी समझ और विषय‑विशिष्ट ज्ञान दोनों का संतुलित आकलन संभव हुआ।
मुख्य बातें
- 78 MBA छात्रों ने AI चैटबॉट बनाकर मिडटर्म परीक्षा दी।
- परीक्षा में 15 प्रश्न थे, जिनके उत्तर चैटबॉट द्वारा तैयार किए गए।
- प्रोफेसर सुभब्रत मजूमदार ने वर्सेल पर एक विशेष डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया।
- अंतिम उत्तरों की जाँच मानवीय टीचिंग असिस्टेंट ने की, AI ने नहीं।
- यह पहल AI के व्यावहारिक उपयोग और प्रॉम्प्टिंग कौशल को मापने के लिए की गई।
इस प्रयोग से यह स्पष्ट होता है कि प्रबंधन शिक्षा में भी तकनीकी नवाचार को शामिल कर छात्रों की भविष्य‑उन्मुख क्षमताओं का मूल्यांकन किया जा सकता है। IIM बेंगलुरु की यह पहल अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जहाँ लिखित परीक्षा के साथ‑साथ प्रैक्टिकल AI कौशल को भी महत्व दिया जाता है।




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