Skip to content
Tuesday, 06 October 2026|India
06 Octआज की खबरें
LIVE TV
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़
मुंबई के BEST अणिक डिपो में लगी भीषण आग, 10 नई AC CNG बसें जलकर खाक•हिंगोली में पटाखा गोदाम में भीषण आग, 2 की मौत और 10-12 गंभीर घायल•IGI एयरपोर्ट पर कस्टम्स ने 3 करोड़ रुपये की ज्वेलरी और कीमती पत्थर जब्त किए•खुर्जा में प्रशासन और प्रदूषण विभाग का कड़ा एक्शन, एनओसी न होने पर दो पॉटरी इकाइयां सील•परिषदीय विद्यालयों के बच्चों और शिक्षकों ने चलाया पराली प्रबंधन जागरूकता अभियान•जम्मू‑कश्मीर में लश्कर‑ए‑तैयबा के कमांडर हाशिम मूसा ने घाव भरने के लिए शहद का सहारा लिया•असम में पाकिस्तान को रक्षा जानकारी भेजने के आरोप में दो लोगों की गिरफ्तारी, सेवानिवृत्त सेना जवान भी शामिल•सुप्रीम कोर्ट में SIR याचिकाओं की सुनवाई, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति की भारत यात्रा शुरूमुंबई के BEST अणिक डिपो में लगी भीषण आग, 10 नई AC CNG बसें जलकर खाक•हिंगोली में पटाखा गोदाम में भीषण आग, 2 की मौत और 10-12 गंभीर घायल•IGI एयरपोर्ट पर कस्टम्स ने 3 करोड़ रुपये की ज्वेलरी और कीमती पत्थर जब्त किए•खुर्जा में प्रशासन और प्रदूषण विभाग का कड़ा एक्शन, एनओसी न होने पर दो पॉटरी इकाइयां सील•परिषदीय विद्यालयों के बच्चों और शिक्षकों ने चलाया पराली प्रबंधन जागरूकता अभियान•जम्मू‑कश्मीर में लश्कर‑ए‑तैयबा के कमांडर हाशिम मूसा ने घाव भरने के लिए शहद का सहारा लिया•असम में पाकिस्तान को रक्षा जानकारी भेजने के आरोप में दो लोगों की गिरफ्तारी, सेवानिवृत्त सेना जवान भी शामिल•सुप्रीम कोर्ट में SIR याचिकाओं की सुनवाई, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति की भारत यात्रा शुरू
विज्ञापन
Home » आईवीएफ से पहले किन महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: डॉक्टर कृति तिवारी की सलाह
Health

आईवीएफ से पहले किन महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: डॉक्टर कृति तिवारी की सलाह

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 05 Oct 2026• अपडेट 05 Oct 2026• 1 views
आईवीएफ से पहले किन महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: डॉक्टर कृति तिवारी की सलाह
आईवीएफ एक प्रभावी प्रजनन तकनीक है, पर कुछ स्वास्थ्य स्थितियों वाले महिलाओं को इसे अपनाने से पहले विशेष सावधानी और उपचार की जरूरत होती है। डॉक्टर कृति तिवारी ने प्रमुख जोखिम कारकों…

प्रजनन क्षमता में समस्या का सामना कर रही महिलाओं के लिए इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (आईवीएफ) एक वरदान साबित हुआ है। लेकिन हर महिला के लिए यह प्रक्रिया समान रूप से सुरक्षित नहीं है। आईवीएफ शुरू करने से पहले कुछ स्वास्थ्य स्थितियों वाले महिलाओं को विशेष ध्यान देना आवश्यक है, यह बात आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. कृति तिवारी ने स्पष्ट की है।

आईवीएफ के सामान्य मानदंड

आमतौर पर आईवीएफ के लिए कोई कठोर शर्तें नहीं होतीं; यदि महिला के अंडाणु उत्पादन या गर्भाशय की स्थिति में समस्या है तो यह विकल्प उपलब्ध कराया जाता है। फिर भी, कुछ चिकित्सीय स्थितियों में इस उपचार को रोकना या अत्यधिक सतर्कता बरतना आवश्यक हो जाता है।

मुख्य जोखिम कारक जिन पर विशेष ध्यान देना चाहिए

  • हृदय एवं फेफड़े की बीमारियां – गंभीर हृदय रोग या फेफड़े की रोग स्थितियों वाले मरीजों को आईवीएफ की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि एनीस्थीसिया और हार्मोन थेरेपी से जोखिम बढ़ सकता है।
  • किडनी या लिवर फेल्योर – किडनी या लिवर की कार्यक्षमता में गंभीर कमी (स्टेज 3 या उससे आगे) होने पर प्रक्रिया जानलेवा हो सकती है।
  • गर्भाशय (बच्चेदानी) की संरचनात्मक समस्याएं – यदि गर्भाशय में अत्यधिक झिल्लियां, अत्यधिक पतली दीवारें, या गर्भाशय का अभाव हो, तो एम्ब्रियो को स्थापित करना संभव नहीं रहता।
  • अनकंट्रोल्ड मेडिकल डिसऑर्डर – डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, या थायरॉयड विकार जैसे रोगों का नियंत्रण न हो तो आईवीएफ से जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
  • कैंसर एवं कीमो/रेडियोथेरेपी – सक्रिय कैंसर उपचार के दौरान या उसके बाद तुरंत आईवीएफ नहीं किया जाता। इस स्थिति में फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन (अंडाणु/स्पर्म संरक्षण) को प्राथमिकता दी जाती है।

सुरक्षित आईवीएफ के लिए कदम

उपरोक्त जोखिम कारकों की पहचान होने पर डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित क्रम अपनाते हैं:

  • संपूर्ण मेडिकल जांच – हृदय, फेफड़े, किडनी, लिवर, रक्त शर्करा, रक्तचाप और थायरॉयड स्तर की विस्तृत जांच।
  • मौजूदा रोगों का नियंत्रण – यदि डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर अनकंट्रोल्ड है, तो पहले इनका उपचार किया जाता है।
  • गर्भाशय की इमेजिंग – अल्ट्रासाउंड या MRI द्वारा गर्भाशय की संरचना का मूल्यांकन।
  • यदि कैंसर उपचार चल रहा है, तो फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन के विकल्पों पर चर्चा।
  • सभी जोखिमों को समझते हुए, डॉक्टर की सलाह के बाद ही आईवीएफ प्रक्रिया शुरू करना।

डॉ. कृति तिवारी की सलाह

डॉ. कृति तिवारी ने कहा, “आईवीएफ एक अत्यंत प्रभावी तकनीक है, पर इसे अपनाने से पहले महिला के समग्र स्वास्थ्य का मूल्यांकन अनिवार्य है। यदि कोई गंभीर हृदय, फेफड़े, किडनी या लिवर की समस्या मौजूद है, तो इस प्रक्रिया को टालना चाहिए या वैकल्पिक विकल्पों पर विचार करना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “अनकंट्रोल्ड डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों को पहले स्थिर करना चाहिए, तभी आईवीएफ के परिणाम सुरक्षित रहेंगे।”

आपके लिए संबंधित खबरें

वैकल्पिक विकल्प

जब आईवीएफ नहीं किया जा सकता, तो निम्नलिखित विकल्पों पर विचार किया जा सकता है:

  • फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन – अंडाणु या स्पर्म को फ्रीज कर भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखना।
  • सरोगेसी – दाता अंडाणु या गर्भधारण के लिए वैकल्पिक मातृत्व।
  • एडॉप्टेड मेडिकेशन – रोग नियंत्रण के बाद पुनः आईवीएफ की योजना बनाना।

निष्कर्ष

आईवीएफ एक जीवन बदलने वाली प्रक्रिया है, पर यह सभी के लिए समान रूप से सुरक्षित नहीं है। हृदय, फेफड़े, किडनी, लिवर, गर्भाशय की संरचना और मौजूदा मेडिकल डिसऑर्डर जैसे प्रमुख कारकों का मूल्यांकन करके ही इस उपचार को अपनाया जाना चाहिए। डॉक्टर की मार्गदर्शन में उचित जांच और रोग नियंत्रण के बाद ही आईवीएफ की योजना बनाना चाहिए, ताकि मातृत्व की खुशी सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से प्राप्त हो सके।

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook X Telegram
💬 0 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ

0

अपनी टिप्पणी लिखें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

⌂होम🔥ब्रेकिंग▣लेटेस्ट▶वीडियो⌕खोजें