5 साल के अर्जुन प्रजापति का IQ 141, 3000 से अधिक किताबें पढ़ी
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भारतीय मूल के पाँच साल के अर्जुन प्रजापति ने 141 IQ स्कोर के साथ अपने उम्र के कई साथियों से आगे निकलते हुए 3000 से अधिक किताबें पढ़ी हैं। उनका यह उल्लेखनीय प्रदर्शन विज्ञान, तकनीक और मानव जीनetics में गहरी रुचि के साथ जुड़ा है।
मुख्य बातें
- अर्जुन का IQ 141, 99.7th पर्सेंटाइल में
- अब तक 3000 से अधिक किताबें पढ़ी
- ब्लैक होल, ह्यूमन जेनेटिक्स, इम्यून सिस्टम जैसे विषयों में गहरी जिज्ञासा
- 4 साल की उम्र में मेंसा और इंटरटेल की सदस्यता के लिए क्वालिफाई किया
- कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से बधाई पत्र प्राप्त
- 18 महीने की उम्र में पढ़ना शुरू किया
अर्जुन की शैक्षणिक उपलब्धियां
अर्जुन का जन्म वडोदरा के एक गुजराती परिवार में हुआ और बाद में उनका परिवार कनाडा में बस गया। चार साल 10 महीने की उम्र में स्टैनफोर्ड‑बिनेट इंटेलिजेंस स्केल्स (फिफ्थ एडिशन) के तहत एक फॉर्मल कॉग्निटिव असेसमेंट किया गया, जिसमें उनका कुल IQ 141 दर्ज हुआ। इस एसेसमेंट में नॉन‑वर्बल IQ 149, फ्लूइड रीजनिंग 144 और वर्किंग मेमोरी 146 स्कोर भी मिले, जिससे उनका दिमागी कार्य ‘टैलेंटेड’ वर्गीकृत हुआ।
हाई‑IQ सोसाइटी में सदस्यता
अर्जुन ने मात्र चार साल की उम्र में दो अंतरराष्ट्रीय हाई‑IQ सोसाइटी – मेंसा और इंटरटेल – की सदस्यता के लिए क्वालिफाई किया। यह उपलब्धि उनके उच्च बौद्धिक क्षमताओं का प्रमाण है।
कनाडा के प्रधानमंत्री से बधाई
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अर्जुन को बधाई का पत्र भेजा, जिससे उनके परिवार को अत्यधिक गर्व महसूस हुआ।
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पुस्तक प्रेम और विषयों की विविधता
अर्जुन ने 18 महीने की उम्र में पढ़ना शुरू किया और तब से ही किताबों के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया। उनके पिता ने बताया कि कार में हमेशा आठ से दस किताबें रखी जाती हैं, क्योंकि अर्जुन अक्सर कहता है, “डैडी, अगर मैं बोर हो गया तो? मेरे पास पढ़ने के लिए कम से कम एक किताब तो होनी चाहिए।”
शुरुआत में तस्वीरों वाली किताबें उसकी पसंद थीं, लेकिन धीरे‑धीरे वह ब्लैक होल, डायनासोर, मानव इम्यून सिस्टम, माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी जैसे जटिल विषयों में भी गहरी रुचि ले रहा है।
परिवार की भूमिका
अर्जुन के पिता ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद ही उन्होंने बच्चे को इधर‑उधर देखते हुए देखा, जिससे उसकी जिज्ञासा स्पष्ट हुई। माता‑पिता ने उसकी पढ़ाई के लिए एक सहयोगी माहौल तैयार किया, जिससे वह शब्दों को पहचानने, पैटर्न समझने और तथ्य याद रखने में निपुण हो गया।
भविष्य की संभावनाएं
अर्जुन की वर्तमान रुचियां विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित, माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी तक फैली हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी प्रारम्भिक बौद्धिक विकास वाले बच्चों में आगे के शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान की संभावना रहती है।
“अर्जुन की जिज्ञासा उसकी उम्र से कहीं अधिक है, और उसका पढ़ने का जुनून उसे नई ऊँचाइयों की ओर ले जा रहा है,” पिता ने कहा।




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