23 साल बाद परिवार आया, लेकिन 78 वर्षीय टीबी‑पड़ित बुजुर्ग को घर ले जाने से इनकार
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हरियाणा के करनाल में स्थित सुभद्रा मानव कल्याण सेवा संस्थान के वृद्धाश्रम में 78 वर्ष के टीबी‑पड़ित बुजुर्ग को 23 साल बाद उनका परिवार मिलने आया, पर बुजुर्ग को घर ले जाने से परिवार ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। यह घटना सामाजिक जिम्मेदारी और परिवारिक बंधनों की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।
बुजुर्ग की पृष्ठभूमि और वृद्धाश्रम में प्रवेश
वृद्धाश्रम में रहने वाले इस बुजुर्ग ने लगभग 15 साल तक रिक्शा चलाकर अपना गुजारा किया। उम्र बढ़ने और ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) से ग्रस्त होने के कारण वह शारीरिक रूप से असहाय हो गए। लगभग छह महीने पहले, सुभद्रा मानव कल्याण सेवा संस्थान ने उन्हें आश्रय प्रदान किया और वर्तमान में उनका इलाज जारी है।
परिवार का आगमन और प्रतिक्रिया
बुजुर्ग की तबियत बिगड़ने पर आश्रम ने उनके परिवार को बुलाया। परिवार – पत्नी, बेटा और बेटी – आश्रम में पहुँचे और बुजुर्ग को देखकर उनकी आँखें भर आईं। बुजुर्ग ने हाथ जोड़कर अपने साथ घर ले जाने की गुहार लगाई, परंतु परिवार ने कहा कि वह बीमार है और उन्हें साथ नहीं ले जा सकते। उन्होंने आश्रम संचालक को अपना संपर्क नंबर दिया, यह कहकर कि अगर कुछ हो जाए तो सूचित किया जाए।
आश्रम संचालक का बयान
आश्रम के संचालक नीलू ने बताया कि उन्होंने परिवार को समझाने की कई बार कोशिश की, पर कोई सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा, “यह समाज की एक कड़वी सच्चाई है, जहाँ अपने ही अपनों से मुंह फेर रहे हैं।” वर्तमान में बुजुर्ग का इलाज आश्रम में ही जारी है और उन्हें नियमित देखभाल मिल रही है।
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मुख्य बातें
- बुजुर्ग 78 वर्ष के हैं, टीबी से ग्रस्त और शारीरिक रूप से असहाय।
- पिछले 23 साल से वह अपने परिवार से अलग रहे।
- आश्रम ने उन्हें 6 महीने पहले शरण दी और इलाज शुरू किया।
- परिवार ने बुजुर्ग को घर ले जाने से स्पष्ट इनकार किया।
- आश्रम संचालक ने परिवार को समझाने की कई बार कोशिश की, पर कोई परिणाम नहीं मिला।
समाज और नीति पर विचार
यह घटना वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा और परिवारिक जिम्मेदारी के मुद्दों को फिर से सामने लाती है। जबकि भारत में वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है, कई बुजुर्ग अभी भी अपने परिवारों से अलग रहकर आश्रमों में आश्रय लेते हैं। इस प्रकार के मामलों में सामाजिक जागरूकता, सरकारी नीतियों का सुदृढ़ कार्यान्वयन और सामुदायिक समर्थन की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
आगे की स्थिति
वर्तमान में बुजुर्ग का इलाज आश्रम में ही जारी है। आश्रम ने परिवार को बताया कि यदि बुजुर्ग की स्थिति में कोई बदलाव आता है तो तुरंत सूचित किया जाएगा। इस बीच, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन से अपील है कि वे ऐसे मामलों में बुजुर्गों की देखभाल और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान करें।




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