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तकनीकी

ट्रम्प ने AI कंपनियों को ‘सेल्फ‑पोलिसिंग’ समझौते पर हस्ताक्षर करने को कहा, मोरली बाइंडिंग का क्या मतलब?

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 30 Sep 2026• अपडेट 30 Sep 2026• 24 views
ट्रम्प ने AI कंपनियों को ‘सेल्फ‑पोलिसिंग’ समझौते पर हस्ताक्षर करने को कहा, मोरली बाइंडिंग का क्या मतलब?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में AI दिग्गजों के साथ एक मोरली बाइंडिंग समझौता किया, जिसमें कंपनियों को अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की सुरक्षा खुद देखनी होगी। यह समझौता कानूनी…

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में AI कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक में कहा कि देश की बड़ी AI कंपनियों को अपनी तकनीक की निगरानी खुद करनी होगी। इस समझौते को उन्होंने “सेल्फ‑पोलिसिंग” और “मोरली बाइंडिंग” कहा, जिसका अर्थ है कि कंपनियां स्वेच्छा से सुरक्षा उपाय अपनाएंगी, लेकिन यह कोई कानूनी बाध्यकारी नियम नहीं है।

सेल्फ‑पोलिसिंग समझौते की मुख्य बातें

बैठक में ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि सरकार AI के विकास को रोकना या अतिरिक्त सुरक्षा नियम (गर्डरेल) लागू करना नहीं चाहती। बल्कि, वह चाहता है कि कंपनियां खुद ही अपने AI सिस्टम की सुरक्षा, विश्वसनीयता और उपयोगकर्ता भरोसे को सुनिश्चित करें। इस समझौते के तहत प्रत्येक कंपनी को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:

  • AI विकास प्रक्रिया में सुरक्षा‑समीक्षा प्रणाली स्थापित करना।
  • समस्याओं की पहचान, जांच और सुधार के लिए एक समर्पित टीम बनाना।
  • बाहरी विशेषज्ञों या ऑडिटर्स की मदद से नियमित जांच कराना।
  • एक स्वतंत्र बोर्ड/कमेटी की निगरानी में सुरक्षा उपायों की रिपोर्ट तैयार करना।

मोरली बाइंडिंग का अर्थ

ट्रम्प ने कहा कि यह समझौता “मोरली बाइंडिंग” है, यानी कंपनियों ने इसे नैतिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया है, लेकिन यह कोई कानूनी रूप से लागू होने वाला नियम नहीं है। इसलिए, यदि कोई कंपनी इस समझौते का उल्लंघन करती है, तो उसे कानूनी दंड नहीं मिलेगा, परन्तु सार्वजनिक भरोसा और व्यावसायिक प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा।

बैठक में कौन-कौन शामिल थे?

व्हाइट हाउस में इस चर्चा में कई प्रमुख टेक कंपनियों के सीईओ और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे, साथ ही हाउस स्पीकर माइक जॉनसन भी उपस्थित थे। प्रमुख प्रतिभागियों में शामिल थे:

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  • Anthropic के सीईओ डेरियो अमोदेई
  • OpenAI के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन
  • Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस
  • Elon Musk (X.ai)
  • NVIDIA के सीईओ जेनसन हुआंग
  • Google के सीईओ सुन्दर पिचाई
  • Meta के सीईओ मार्क जुकरबर्ग
  • Microsoft के सीईओ सत्या नडेला

बैठक के बाद ट्रम्प ने इस समझौते की सीटिंग चार्ट को अपने Truth Social अकाउंट पर साझा किया।

ट्रम्प का AI पर दृष्टिकोण

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका AI की तेज़ी को रोकना नहीं चाहता; वह इसे “Industrial Revolution से भी बड़ी” तकनीक मानते हैं। उन्होंने AI को “Super Intelligence” कहने की इच्छा भी जताई, यह तर्क देते हुए कि “Artificial” शब्द पूरी तरह से सटीक नहीं है।

उपभोक्ता और उद्योग पर संभावित प्रभाव

यदि कंपनियां इस स्वैच्छिक समझौते को सच्चाई से लागू करती हैं, तो AI सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी, गलत उपयोग की संभावना घटेगी और उपभोक्ता भरोसा मजबूत होगा। दूसरी ओर, क्योंकि यह कानूनी रूप से बाध्य नहीं है, इसलिए निगरानी और अनुपालन की प्रभावशीलता अभी भी प्रश्नवाचक बनी रहेगी।

मुख्य बातें

  • ट्रम्प ने AI कंपनियों को “सेल्फ‑पोलिसिंग” समझौते पर हस्ताक्षर करने को कहा।
  • समझौता मोरली बाइंडिंग है, कानूनी बाध्य नहीं।
  • कंपनियों को सुरक्षा‑समीक्षा, स्वतंत्र टीम, बाहरी ऑडिट और एक स्वतंत्र बोर्ड स्थापित करना होगा।
  • बैठक में Anthropic, OpenAI, Amazon, X.ai, NVIDIA, Google, Meta, Microsoft के सीईओ शामिल थे।
  • ट्रम्प AI को “Super Intelligence” कहने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन विकास को रोकने के विरुद्ध हैं।

यह समझौता इस बात का संकेत है कि अमेरिकी सरकार AI के तेज़ विकास को नियंत्रित करने के बजाय उद्योग की स्वैच्छिक जिम्मेदारी पर भरोसा कर रही है। भविष्य में इस मॉडल की सफलता या विफलता AI नियामक ढांचे के विकास को प्रभावित कर सकती है।

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