निफ्टी 50 पर 25 साल का सबसे बड़ा गिरावट का सिलसिला: लगातार 8वें हफ्ते गिरावट की कगार
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निफ्टी 50 ने लगातार आठवें हफ्ते गिरावट दर्ज की, जिससे यह पिछले 25 सालों में सबसे लंबी निरंतर गिरावट की कगार पर पहुंच गया है। ग्लोबल अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाला है, जबकि घरेलू आर्थिक मजबूती और वैल्यूएशन में कमी से संभावित समर्थन की उम्मीद है।
इतिहास में तुलना
25 सितंबर को समाप्त हुए हफ्ते में निफ्टी 50 का स्तर 23,140.5 पर रहा, और सात हफ्तों में कुल गिरावट 5.8% रही। यह गिरावट 2001, 2008 और 2020 के समान अवधि में हुई गिरावटों से कम गंभीर है, जहाँ क्रमशः 20.5%, 22.1% और 33.3% गिरावट दर्ज हुई थी। सबसे लंबी निरंतर गिरावट 1993 में 10 हफ्तों की थी, जिसमें 22.9% गिरावट हुई थी।
तकनीकी स्थिति
टेक्निकल एनालिस्ट्स ने बताया कि निफ्टी दैनिक चार्ट पर लगातार ‘लोअर टॉप’ और ‘लोअर बॉटम’ बना रहा है। वर्तमान में यह नया लोअर बॉटम बनाने की प्रक्रिया में है, और 22,900‑23,000 के स्तर पर कोई भी उछाल अस्थायी माना जा रहा है। HDFC सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी ने इसे ‘सेल‑ऑन‑राइज’ (बढ़त पर बिकवाली) का अवसर बताया। यदि 22,550 के नीचे गिरावट जारी रही तो निकट भविष्य में 22,200 तक गिरावट की संभावना है।
SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह ने बताया कि RSI 40 से नीचे है, MACD जीरो लाइन के नीचे नीचे की ओर झुका है, और ADX बढ़ रहा है, जो बेयरिश ट्रेंड की मजबूती दर्शाता है। निफ्टी 20‑दिन और 50‑दिन के EMA से नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे शॉर्ट कवरिंग और फॉलो‑अप बाइंग की जरूरत पर बल दिया गया है।
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ग्लोबल मैक्रो‑इकोनॉमिक दबाव
ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर है, और US 10‑साल की ट्रेजरी यील्ड 5% से ऊपर ट्रेड कर रही है। इस माह विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से लगभग ₹26,000 करोड़ निकाले हैं, जिससे कुल निकासी लगभग ₹2.5 लाख करोड़ हो गई है। सख्त मौद्रिक नीति की संभावना भी इक्विटी बाजार के लिए जोखिम बढ़ा रही है।
बोफा सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि RBI अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि करेगा, जबकि उन्होंने संभावित वृद्धि को 50‑100 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा दिया है। ऊर्जा कीमतों में पुनः वृद्धि और फ्यूल की कीमतों के बढ़ने से सप्लाई‑साइड महंगाई के जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
वैल्यूएशन और जोखिम‑रिवॉर्ड
वैल्यूएशन में गिरावट के कारण निफ्टी 50 अब अपेक्षाकृत सस्ता हो गया है। एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट के आलोक अग्रवाल ने बताया कि निफ्टी 50 का वन‑ईयर फॉरवर्ड P/E 21.5x (सितंबर 2024) से घटकर 17.4x (सितंबर 2026) हो गया है। लार्ज‑कैप और मिड‑कैप में क्रमशः 29% और 27% की वैल्यूएशन गिरावट देखी गई, जबकि स्मॉल‑कैप में 4% की गिरावट रही।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि घरेलू डेटा, जैसे IIP ग्रोथ 8% और शहरी क्षेत्रों में गैर‑जरूरी वस्तुओं की मांग में सुधार, ग्लोबल कमजोरी की भरपाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैल्यूएशन अब अपने पीक से नीचे हैं, और जोखिम‑रिवॉर्ड प्रोफ़ाइल बेहतर हो गई है।
मुख्य बातें
- निफ्टी 50 लगातार आठवें हफ्ते गिरावट, 25 साल में सबसे लंबी निरंतर गिरावट की कगार पर।
- सप्ताह के अंत में निफ्टी 23,140.5 पर, सात हफ्तों में 5.8% गिरावट।
- टेक्निकल संकेत: लोअर टॉप/बॉटम, RSI 40 से नीचे, MACD नीचे, ADX बढ़ रहा।
- भविष्य में 22,200 स्तर तक गिरावट की संभावना, यदि 22,550 के नीचे गिरावट जारी रही।
- ग्लोबल दबाव: ब्रेंट $100+, US 10‑साल की यील्ड 5%+, FII निकासी ₹2.5 लाख करोड़।
- RBI से 25‑100 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि की संभावना।
- वैल्यूएशन में सुधार: निफ्टी का फॉरवर्ड P/E 21.5x से 17.4x तक गिरा।
- डोमेस्टिक डेटा (IIP, शहरी मांग) ग्लोबल कमजोरी को संतुलित कर रहा है।
आगे का रास्ता
बाजार विशेषज्ञ इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या प्रमुख सपोर्ट लेवल्स पर बुल्स वापसी कर पाएंगे। यदि बुलिश संकेत मजबूत होते हैं, तो निफ्टी 22,900‑23,000 के स्तर पर अस्थायी उछाल देख सकता है। अन्यथा, बेयरिश ट्रेंड जारी रह सकता है, जिससे निफ्टी 22,200 या उससे नीचे गिरावट का जोखिम बना रहेगा। निवेशकों को तकनीकी संकेतकों और ग्लोबल मैक्रो‑इकोनॉमिक विकास पर सतर्कता से नजर रखनी चाहिए।




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