JEE एडवांस्ड में 3 मौके देने की मांग पर 12,000 से अधिक कैंडिडेट्स ने किया शिक्षा मंत्रालय को आग्रह
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जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट (JEE) एडवांस्ड में दो के बजाय तीन मौके देने की मांग को लेकर 12,000 से अधिक कैंडिडेट्स ने शिक्षा मंत्रालय, IIT काउंसिल और जॉइंट एडमिशन बोर्ड (JAB) को औपचारिक ज्ञापन सौंपा। यह पहल पिछले तीन महीनों से सक्रिय है और उम्मीदवारों ने इस नियम में बदलाव की तत्काल समीक्षा की अपील की है।
JEE एडवांस्ड का मौजूदा नियम
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में प्रवेश के लिए आयोजित JEE एडवांस्ड में केवल टॉप 2.50 लाख (आरक्षण लागू) कैंडिडेट्स को दो मौके मिलते हैं। पहला मौका 12वीं पास करने के उसी वर्ष में आता है, जबकि दूसरा मौका अगले वर्ष में दिया जाता है। इस दो‑मौके के नियम को कई बार बदलने की मांग की जा रही है।
उम्मीदवारों की मुख्य मांगें
कैंडिडेट्स ने अपनी याचिका में तीन प्रमुख बिंदु रखे हैं:
- मौजूदा दो‑मौके के नियम को बदलकर तीन मौके प्रदान किए जाएँ, जिससे छात्रों को अतिरिक्त तैयारी का समय मिले।
- या कम से कम तीन साल में दो मौके देने का विकल्प दिया जाए, जिससे किसी भी अनपेक्षित परिस्थिति (मेडिकल इमरजेंसी, पारिवारिक कारण, परीक्षा तनाव) में छात्र पुनः प्रयास कर सके।
- नियमों की समीक्षा के लिए शिक्षा मंत्रालय, IIT काउंसिल और JAB को तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध।
मुख्य बातें
- 12,000 से अधिक कैंडिडेट्स ने 3‑मौके की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
- वर्तमान में JEE एडवांस्ड में केवल दो मौके उपलब्ध हैं, जो 12वीं पास करने के वर्ष और अगले वर्ष में निर्धारित होते हैं।
- उम्मीदवारों ने तनाव, कोचिंग खर्च और अप्रत्याशित व्यक्तिगत कारणों को दो‑मौके के नियम के खिलाफ प्रमुख कारण बताया।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, IIT काउंसिल और JAB को नियमों की समीक्षा करने की अपील की गई है।
- इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, कैंडिडेट्स ने IIT दिल्ली के JEE एडवांस्ड चेयरमैन और शिक्षा मंत्रालय के सचिव (IITs) को अलग‑अलग ज्ञापन सौंपे हैं।
पृष्ठभूमि: JEE एडवांस्ड की प्रक्रिया
JEE एडवांस्ड भारत के शीर्ष तकनीकी संस्थानों – IITs – में प्रवेश का द्वार है। प्रत्येक वर्ष लाखों aspirants JEE मेन में भाग लेते हैं, जिसमें टॉप 2.50 लाख को एडवांस्ड में बुलाया जाता है। दो मौके का नियम 2000 के दशक में लागू किया गया था, लेकिन छात्रों और कोचिंग संस्थानों से लगातार सुधार की मांग आती रही है।
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उम्मीदवारों की चिंताएँ
कैंडिडेट्स ने अपने ज्ञापन में बताया कि कई बार मेडिकल इमरजेंसी, पारिवारिक समस्याएँ या परीक्षा‑से‑पहले तनाव के कारण तैयारी में बाधा आती है। दो मौके के नियम के कारण कई बार योग्य छात्र भी एडवांस्ड में प्रवेश नहीं पा पाते। तीन मौके या तीन साल में दो मौके का विकल्प उन्हें अधिक लचीलापन प्रदान करेगा।
आगे का रास्ता
शिक्षा मंत्रालय ने अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में JEE‑Mains और JEE‑Advanced के नियमों में बदलाव हुए हैं, जिससे इस बार भी परिवर्तन की संभावना बनी हुई है। उम्मीदवारों ने कहा है कि यदि नियमों में सुधार नहीं हुआ तो वे आगे भी सार्वजनिक मंचों, सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के माध्यम से दबाव बनाते रहेंगे।
संभावित प्रभाव
यदि तीन मौके का नियम लागू किया जाता है, तो:
- छात्रों को अतिरिक्त तैयारी का समय मिलेगा, जिससे कुल प्रवेश दर में संभावित वृद्धि हो सकती है।
- कोचिंग संस्थानों के शुल्क संरचना में बदलाव आ सकता है, क्योंकि अधिक बार परीक्षा देने की संभावना होगी।
- IITs की सीटों की प्रतिस्पर्धा में बदलाव आ सकता है, जिससे चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार आवश्यक हो सकता है।
वर्तमान में इस मुद्दे पर आगे की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कैंडिडेट्स की आवाज़ें बढ़ती जा रही हैं।




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