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Home » गरीब परिवार को नहीं मिला आशियाना – खाना बदोष की तरह जिंदगी को मजबूर।
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गरीब परिवार को नहीं मिला आशियाना – खाना बदोष की तरह जिंदगी को मजबूर।

2 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 06 Jan 2021• अपडेट 06 Jan 2021
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गरीब परिवार को नहीं मिली आशियाना –   खाना बदोष की तरह जिंदगी को मजबूर-   सुल्तानपुर- अभी भी क्षेत्र के गांवों में ऐसे…

गरीब परिवार को नहीं मिली आशियाना –

 

खाना बदोष की तरह जिंदगी को मजबूर-

 

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सुल्तानपुर- अभी भी क्षेत्र के गांवों में ऐसे कई परिवार  हैं, जो खाना बदोष की जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामप्रधानों, अधिकारियों, कर्मचारियों की मिली भगत  के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ पहले उन्हीं को दिया जाता  है, जो प्रधान के करीबी हों या पहुंच वाले हों, या फिर सुविधा शुल्क देने वाले हों। अभी भी कई गरीब परिवार  सरकारी सुविधाओं से बंचित हैं।जो टूटी- फूटी झोपड़पट्टियों में गुजारा करने को विवस हैं।

 

बानगी के तौर पर विकासखंड कूरेभार के ग्रामपंचायत सैदखानपुर में रुषहा मठिया गाँव के  दलित मजदूर रामचन्दर का परिवार अभी भी गरीबी की मार झेलने को मजबूर है। जिसके पास ठीक से रहने के लिए छप्पर भी मुहैया नहीं है। पत्नी समेत चार बच्चों के साथ टूटी फूटी झोपड़ पट्टी में किसी तरह गुजर बसर कर रहा है।

 

पूंछने पर रामचंदर ने बताया कि, मैं गरीबी की मार से  तंग आ गया हूँ। मेहनत मजदूरी कर किसी तरह परिवार के छः सदस्यों का भरण पोषण करता हूँ। गाँव में कई लोगों  को प्रधान मंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है। हमने भी कई बार ग्रामप्रधान व ग्राम विकास अधिकारी से आवास व शौचालय के लिए शिकायत  की , लेकिन वे कभी कहते हैं कि, तुम्हरा नाम सूची में नही है, कभी कहते हैं आगे पीछे बन जाएगा। सरकार की सख्त हिदायत के बावजूद भी अधिकारी,कर्मचारी अपनी मनमानी से बाज नहीं आरहे।  वे उन्हीं को सरकारी लाभ मुहैया कराते है, जो उनको सुविधा शुल्क देने में चूक नहीं करते।

 

इस बाबत जब मौजूदा ग्रामप्रधान मुरली यादव से बात की गई तो उन्होंने ने बताया प्रधानमंत्री आवास योजना 2011में राम चन्दर का नाम नहीं था, इसलिए इनको आवास नहीं मिल सका।मुख्यमंत्री योजना में इनका नाम भेजा गया है, योजना आने पर इनको आवास मुहैया करवाया जाएगा।

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