प्रयागराज में UGC नियमों पर सवाल करने पर BJP पार्षद विनय मिश्रा पर FIR
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प्रयागराज में UGC के नए नियमों को लेकर हुए विवाद में BJP के भीतर ही हिंसा का मामला सामने आया। एक कार्यकर्ता ने सवाल उठाते ही पार्षद विनय मिश्रा द्वारा थप्पड़ मारने का आरोप लगाया, जिसके बाद दारागंज थाने में FIR दर्ज हुई। इस घटना पर पार्टी के वरिष्ठ नेता हर्षवर्धन बाजपेयी ने भी कड़ी कार्रवाई की मांग की।
घटना का क्रम
रविवार को प्रयागराज के परेड ग्राउंड में आयोजित “प्रबुद्ध” सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान BJP कार्यकर्ता रोहित तिवारी (उर्फ काका) और एक अन्य व्यक्ति ने UGC विनियम, 2026 को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मौर्य से सीधे पूछते हुए कहा, “आप हमारे बारे में कब बोलेंगे? कृपया UGC के बारे में बोलिए।” मौर्य ने उन्हें चुप रहने का निर्देश दिया और कहा, “मैं सब कुछ बोलूँगा।”
सवाल उठाने के बाद पुलिस ने दोनों व्यक्तियों को कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया, परन्तु इस दौरान BJP पार्षद विनय मिश्रा ने रोहित तिवारी की ओर दौड़ते हुए उसे पकड़ लिया और थप्पड़ मार दिया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
शिकायत और FIR
घटना के बाद रोहित तिवारी ने प्रयागराज के दारागंज थाने में पार्षद विनय मिश्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। थाने ने शिकायत के आधार पर विनय मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज की। FIR में बताया गया है कि कार्यकर्ता ने UGC नियमों पर सवाल पूछते समय पार्षद द्वारा शारीरिक हमला किया गया।
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पार्टी के भीतर प्रतिक्रिया
बाजपेयी, जो इलाहाबाद उत्तर से BJP विधायक हैं, ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पार्षद के व्यवहार पर सवाल उठाया और कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लिखा, “UGC का विरोध करना हर ब्राह्मण/सवर्ण का हक है।” साथ ही उन्होंने उन लोगों को चेतावनी दी जिन्होंने अपने समाज के लोगों पर हिंसा की, यह कहा कि कोई अपने बच्चे का नाम विभीषण नहीं रखता।
मुख्य बातें
- प्रयागराज में UGC विनियम, 2026 को लेकर BJP कार्यकर्ता रोहित तिवारी ने सवाल उठाए।
- कार्यक्रम में उपस्थित डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सवाल करने वालों को चुप रहने का निर्देश दिया।
- पार्षद विनय मिश्रा ने रोहित तिवारी को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया गया।
- रोहित तिवारी ने दारागंज थाने में FIR दर्ज कराई; FIR में पार्षद के खिलाफ शारीरिक हमला का आरोप है।
- BJP विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी ने पार्षद के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की।
भविष्य की संभावनाएँ
FIR दर्ज होने के बाद मामला पुलिस जांच के अधीन है। यदि जांच में पार्षद के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, पार्टी के भीतर इस घटना ने UGC नियमों के प्रति असंतोष को उजागर किया है, जिससे भविष्य में इस मुद्दे पर और बहसें हो सकती हैं।
यह घटना राजनीतिक दलों के भीतर भी विचार-विमर्श की सीमाओं और शांति-पूर्ण अभिव्यक्ति के अधिकारों पर सवाल उठाती है। यदि इस प्रकार की घटनाएँ दोहराई जाती हैं, तो पार्टी के अनुशासन और सार्वजनिक भरोसे पर असर पड़ सकता है।




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