लाहौर के बच्चों की कव्वाली ने भारत‑पाकिस्तान के दिलों को जोड़ा, वायरल वीडियो में दिखी मासूम आवाज़
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लाहौर के छोटे बच्चों की कव्वाली ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है। ‘सुर ताल अकादमी’ के बच्चों ने पंजाबी गाना “अल्फाज़” गाते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसमें नॉर्वे के प्रसिद्ध डांस ग्रुप क्विकस्टाइल के सदस्य विलियम गैम्बर्ग भी साथ थे। इस वीडियो को भारत और पाकिस्तान दोनों के दर्शकों ने भरपूर सराहा, जिससे संगीत की सीमा‑रहित शक्ति का पुनः प्रमाण मिला।
वीडियो की लोकप्रियता और दर्शकों की प्रतिक्रिया
वीडियो अपलोड होते ही यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर लाखों व्यूज़ मिल गए। भारतीय उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी में बच्चों को “छोटे नुसरत” कहकर प्यार जताया, जबकि पाकिस्तानी दर्शकों ने “दिल छू लेने वाली आवाज़” की प्रशंसा की। कई लोगों ने कहा कि इस प्रकार का संगीत ही दो देशों के बीच की दूरी को कम कर सकता है।
सुर ताल अकादमी की कहानी
‘सुर ताल अकादमी’ 2016 में स्थापित हुई थी। यह अकादमी विशेष रूप से उन बच्चों को मुफ्त संगीत शिक्षा प्रदान करती है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और फीस नहीं दे सकते। अकादमी का उद्देश्य बच्चों को कला के माध्यम से आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल प्रदान करना है। इस पहल के तहत अब तक सैकड़ों बच्चों ने संगीत सीखकर मंच पर प्रदर्शन किया है।
बच्चों की पृष्ठभूमि
वीडियो में दिख रहे प्रमुख बच्चे 9 साल के अब्दुल रहमान सहित कई छोटे कलाकार हैं। अब्दुल ने अपने इंटरव्यू में कहा कि वह इस मंच पर गाने का अवसर पाकर बहुत खुश है और भारत व दुनिया भर के दर्शकों को धन्यवाद देना चाहता है।
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विलियम गैम्बर्ग की भागीदारी
नॉर्वे के डांस ग्रुप क्विकस्टाइल के सदस्य विलियम गैम्बर्ग ने भी इस कव्वाली में भाग लिया। उन्होंने बच्चों के साथ गाते हुए एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक प्रस्तुत किया। इस सहयोग ने दर्शकों को यह दिखाया कि संगीत और कला की भाषा राष्ट्रीय सीमाओं से परे है।
मुख्य बातें
- ‘सुर ताल अकादमी’ के बच्चों ने पंजाबी गाना “अल्फाज़” गाया।
- वीडियो में नॉर्वे के डांस ग्रुप क्विकस्टाइल के विलियम गैम्बर्ग भी शामिल थे।
- वीडियो को भारत और पाकिस्तान दोनों में लाखों व्यूज़ और सकारात्मक टिप्पणियाँ मिलीं।
- अकादमी 2016 से मुफ्त संगीत शिक्षा प्रदान कर रही है, विशेषकर गरीब परिवारों के बच्चों को।
- बच्चों ने कहा कि इस मंच ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से जुड़ने का अवसर मिला।
संगीत की सरहद‑रहित शक्ति
यह वायरल वीडियो यह साबित करता है कि संगीत में वह शक्ति है जो राजनीतिक या सामाजिक विभाजन को पाट सकती है। जब दो देशों के लोग एक ही धुन पर नाचते‑गाते हैं, तो वह भावनात्मक जुड़ाव शब्दों से परे हो जाता है। इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान‑प्रदान से दोनों देशों के बीच समझ और सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
आगे की संभावनाएँ
‘सुर ताल अकादमी’ ने इस सफलता को देखते हुए भविष्य में और अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की योजना बनाई है। अकादमी के संस्थापक ने कहा कि वे बच्चों को विभिन्न शैलियों में प्रशिक्षित करेंगे और उन्हें वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत करने के लिए तैयार करेंगे।
समग्र रूप से, लाहौर के बच्चों की इस कव्वाली ने न केवल संगीत प्रेमियों को आनंदित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि कला के माध्यम से हम सभी एक साथ खड़े हो सकते हैं, चाहे हम किसी भी देश के हों।




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