मेरठ जेल में बंद तीन महिला अपराधियों ने बच्चों के लिए अहोई अष्टमी व्रत रखने की इच्छा जताई
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मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में तीन महिला बंदियों – मुस्कान रस्तोगी, रविता और दामिनी – ने अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए 1 नवंबर को अहोई अष्टमी व्रत रखने की इच्छा जताई। सभी पर अपने-अपने पतियों की हत्या का आरोप है और दो को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।
अहोई अष्टमी व्रत के लिए अनुमति और सामग्री की मांग
तीनों बंदियों ने जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा से व्रत रखने की अनुमति मांगी और पूजन‑सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। जेल में सामाजिक‑धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। सोमवार को ‘संजीवनी महिला संस्था’ की निशी जैन अपनी टीम के साथ जेल पहुँची और करवाचौथ के लिए मिट्टी के करवे व शृंगार सामग्री वितरित की।
मुख्य बातें
- मुस्कान रस्तोगी, रविता और दामिनी ने 1 नवंबर को अहोई अष्टमी व्रत रखने की इच्छा जताई।
- जेल अधीक्षक ने धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति दी और पूजन‑सामग्री की व्यवस्था शुरू की।
- संजीवनी महिला संस्था ने करवाचौथ के लिए मिट्टी के करवे व शृंगार सामग्री प्रदान की।
- मुस्कान ने फांसी की सजा के बाद पूजा‑पाठ छोड़ दिया था, अब फिर से धार्मिक अनुष्ठान करने का मन बनाया।
- जेल मैनुअल के अनुसार महिला बंदियों को व्रत रखने, पूजा‑पाठ करने और आवश्यक सामग्री प्रदान करने की अनुमति है।
तीनों बंदियों के मामले की पृष्ठभूमि
मुस्कान रस्तोगी (नीला ड्रम केस) – अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ पति सौरभ राजपूत को चाकू से मारकर शव के टुकड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में रखे और सीमेंट से ढका। फास्ट‑ट्रैक कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
रविता – अपने पति अमित कश्यप को गला दबाकर मारती है और शव के पास बिस्तर पर जहरीला साँप छोड़कर हत्या को दुर्घटना का रूप देती है। इस मामले में भी कोर्ट ने उसे मृत्युदंड दिया।
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दामिनी – हस्तिनापुर में पति अतुल पंवार की गला दबाकर हत्या करने का आरोप है और वह वर्तमान में मेरठ जेल में बंद है।
जेल में धार्मिक अनुष्ठान की व्यवस्था
जेल प्रशासन ने बताया कि महिला बंदियों को उनकी धार्मिक आस्था के अनुसार व्रत रखने, पूजा‑पाठ करने और फलाहार व पूजन‑सामग्री उपलब्ध कराने की पूरी अनुमति है। यदि पति‑पत्नी दोनों जेल में हों तो विशेष मुलाकात की भी व्यवस्था की जाती है। इस नियम के तहत बाहर से आने वाले पुरुष बंदियों की पत्नियों के लिए भी पूजन व मुलाकात की सुविधा प्रदान की जाती है।
मुस्कान की मौजूदा कानूनी स्थिति
मुस्कान ने मेरठ कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अपील के परिणाम की प्रतीक्षा में वह जेल में है।
“हम अपने बच्चों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए अहोई अष्टमी व्रत रखना चाहते हैं,” मुस्कान, रविता और दामिनी ने जेल में आयोजित बैठक में कहा।
जेल में धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति और सामग्री की उपलब्धता से इन महिलाओं को अपने बच्चों के प्रति प्रेम और आशा व्यक्त करने का अवसर मिला है, जबकि उनके मामलों की कानूनी प्रक्रिया अभी चल रही है।




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