इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ SSP को कोर्ट रूम में 45 मिनट खड़ा किया, CJM के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म मामले में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को कोर्ट रूम में 45 मिनट तक खड़ा रखने का सख्त आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के खिलाफ लापरवाही के कारण प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। यह कदम तब उठाया गया जब हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद आरोपी को कोर्ट के समक्ष पेश नहीं किया गया था।
केस की पृष्ठभूमि
मामला दुष्कर्म आरोपी की जमानत से जुड़ा था। आरोपी को प्रारम्भिक रूप से जमानत मिली थी क्योंकि उसने अदालत में शपथपत्र देकर कहा था कि वह पीड़िता से विवाह करेगा। जमानत मिलने के बाद आरोपी ने वह वादा पूरा नहीं किया, जिससे पीड़िता ने जमानत निरस्त करने की अर्जी दायर की।
हाईकोर्ट का आदेश और एसएसपी की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट ने जमानत निरस्त करने की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा कि गैर‑जमानती वारंट की तामील स्वयं मेरठ एसएसपी ने कराई थी, इसलिए आरोपी को हर हाल में हाईकोर्ट के सामने पेश करना उनका कर्तव्य था। एसएसपी ने बताया कि आरोपी को पहले उनके अधीनस्थ अधिकारी ने सीजेएम के समक्ष पेश किया और सीजेएम ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और एसएसपी को भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी।
कठोर कार्रवाई
हाईकोर्ट ने एसएसपी को 45 मिनट कोर्ट रूम में खड़ा रहने की सजा सुनाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आदेश की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, कोर्ट ने मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए, क्योंकि उनके द्वारा आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजना लापरवाही माना गया।
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आरोपी का अंतिम सामना
कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी को अंततः हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहाँ उसने पीड़िता से विवाह करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके तुरंत बाद कोर्ट ने आरोपी की जमानत निरस्त करने का आदेश दिया।
मुख्य बातें
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ SSP को 45 मिनट कोर्ट रूम में खड़ा किया।
- गैर‑जमानती वारंट की तामील SSP ने कराई थी, इसलिए आरोपी को हाईकोर्ट में पेश करना उनका कर्तव्य था।
- हाईकोर्ट ने मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए।
- आरोपी ने पीड़िता से विवाह करने से इनकार किया, जिससे जमानत निरस्त हुई।
- हाईकोर्ट ने एसएसपी को भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी।




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