‘नीला ड्रम’ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में फांसी की सजा को चुनौती दी
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मेरठ के ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाई मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने 14 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर अपनी सजा को चुनौती दी। दोनों ने 168 पन्नों की अपील में दोषसिद्धि और मृत्युदंड को निरस्त करने तथा सभी आरोपों से बरी होने की मांग की है।
केस की पृष्ठभूमि
30 सितंबर 2026 को मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत (जिसे ‘नीला ड्रम’ केस के नाम से जाना जाता है) की हत्या, शरीर के टुकड़े करने और उसे सीमेंट‑भरे प्लास्टिक ड्रम में छिपाने के जुर्म में दोषी ठहराया। दो दिन बाद, 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी’ के तहत फांसी की सजा सुनाई और 50‑50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील
मुस्कान और साहिल ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ताओं – सुशील शुक्ला, निधि त्रिवेदी, रवितेंद्र प्रताप सिंह चंदेल और संदीप कुमार दुबे – के माध्यम से अपील दायर की। अपील में मुख्य बिंदु हैं:
- अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफलता।
- ट्रायल कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का मूल्यांकन करते समय स्थापित कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की।
- हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद से जुड़े गवाहों के बयानों में विरोधाभास।
- खरीद से संबंधित वैध रसीदें और सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किए जाने की शिकायत।
अपील में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी होने की भी मांग की गई है।
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हाईकोर्ट की प्रक्रिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल होने से ट्रायल कोर्ट का फैसला स्वतः निरस्त नहीं होता। हाईकोर्ट अपील पर सुनवाई करेगा, जहाँ दोनों पक्षों के तर्कों की जांच होगी और फिर निर्णय लिया जाएगा। यदि हाईकोर्ट अपील को स्वीकार करता है तो मृत्युदंड रद्द हो सकता है; अन्यथा अपील अस्वीकृत होने पर मामला उच्चतम न्यायालय में जा सकता है।
मुख्य बातें
- मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने 14 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में 168 पन्नों की अपील दायर की।
- अपील में दोषसिद्धि (30 सितंबर 2026) और फांसी की सजा (14 अक्टूबर 2026) को निरस्त करने की मांग है।
- बचाव पक्ष का तर्क: साक्ष्य अपर्याप्त, गवाहों के बयानों में विरोधाभास, सीसीटीवी फुटेज और रसीदें नहीं पेश हुईं।
- हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय तय होगा।
‘नीला ड्रम’ केस ने देशभर में चर्चा को जन्म दिया था, क्योंकि यह हत्या के बाद शरीर को ड्रम में सीमेंट से बंद करने की अजीब विधि के कारण सार्वजनिक ध्यान का केंद्र बना। अब हाईकोर्ट की सुनवाई इस विवादास्पद मामले को नई दिशा देगी।




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