भारतीय वायुसेना ने ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम के लिए उद्योग को दिया रोडमैप
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नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बुधवार को भारतीय वायुसेना ने ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम (स्वायत्त तकनीक) के लिए अपना भविष्य रोडमैप उद्योग के सामने रखा। इस इंडस्ट्री आउटरीच प्रोग्राम में लगभग 100 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिसमें ड्रोन कंपनियों, स्टार्ट‑अप्स, MSME और अन्य संबंधित उद्योगों के प्रतिनिधि शामिल थे।
कार्यक्रम का उद्देश्य और प्रमुख बिंदु
वायुसेना ने इस कार्यक्रम के माध्यम से अपने भविष्य की तकनीकी जरूरतों को स्पष्ट किया और उद्योग के साथ मिलकर इन जरूरतों को पूरा करने का आग्रह किया। एयर मार्शल प्रेमकुमार, वीएम, वीएसएम, डायरेक्टर जनरल (वेपन सिस्टम्स) और एयर हेडक्वार्टर ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
रोडमैप बुकलेट का वितरण
इंडस्ट्री पार्टनर्स को IAF अनमैन्ड एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स रोडमैप बुकलेट की कॉपी दी गई। यह बुकलेट 14 सितंबर 2026 को पोखरण में आयोजित IAF ड्रोनाथॉन 2026 के दौरान जारी किए गए रोडमैप को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया था। बुकलेट में भविष्य की सैन्य जरूरतों के अनुसार तकनीक विकसित करने के दिशा‑निर्देश शामिल हैं।
मुख्य तकनीकी क्षेत्रों पर फोकस
- स्वदेशी प्रोपल्शन: ड्रोन और ऑटोनॉमस प्लेटफ़ॉर्म के लिए घरेलू इंजन और थ्रस्ट तकनीक पर जोर।
- ऑटोनॉमस सॉफ्टवेयर: स्वायत्त नेविगेशन, मिशन प्लानिंग और रियल‑टाइम डेटा प्रोसेसिंग के लिए भारतीय विकसित सॉफ्टवेयर समाधान।
- मजबूत नेविगेशन: GPS‑अधारित और इन्फ्रारेड/लेज़र‑आधारित सटीक पोजिशनिंग सिस्टम।
- स्टैंडर्ड इंटरफ़ेस: विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म के बीच सहज डेटा एक्सचेंज के लिए सामान्यीकृत इंटरफ़ेस।
रक्षा मंत्रालय की दिशा‑निर्देश
रक्षा मंत्रालय की प्रेस रिलीज के अनुसार, यह रोडमैप मौजूदा और भविष्य के मैन्ड प्लेटफ़ॉर्म को पूरा करने के लिए ऑपरेशनल रूप से प्रासंगिक, भरोसेमंद और मज़बूत स्वदेशी क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है। बिना इंसान वाले सिस्टम में आत्मनिर्भरता को केवल एक आशा नहीं, बल्कि एक आवश्यक ऑपरेशनल जरूरत माना गया है।
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उद्योग के लिए अपेक्षित सहयोग
वायुसेना ने कहा कि स्वदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने और घरेलू डिफेंस इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए उद्योग को सक्रिय रूप से भाग लेना होगा। इस दिशा में, कंपनियों को बुकलेट में उल्लिखित तकनीकी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को तेज़ करने, प्रोटोटाइप बनाकर परीक्षण करने और वायुसेना के साथ मिलकर वैरिफ़िकेशन प्रक्रिया को पूरा करने की अपेक्षा है।
आगे की राह
यह पहल IAF ड्रोनाथॉन 2026 के बाद जारी की गई है और भविष्य में नियमित रूप से उद्योग के साथ संवाद सत्र आयोजित करने की योजना है। वायुसेना ने कहा कि इस रोडमैप के आधार पर अगले कुछ वर्षों में विभिन्न वर्गों के ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम की डिमांड को पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट्स की घोषणा की जाएगी।




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