एशियन पैरा गेम्स 2026: मनीष नरवाल की प्रेरणादायक कहानी और सिल्वर मेडल
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जापान के नागोया में एशियन पैरा गेम्स 2026 के दौरान भारतीय पैरा शूटर मनीष नरवाल ने 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 स्पर्धा में 233.7 अंक हासिल कर सिल्वर मेडल जीता। यह जीत न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी को उजागर करती है, बल्कि भारत को लॉस एंजिल्स 2028 पैरालंपिक्स के लिए कोटा भी सुनिश्चित करती है।
मनीष नरवाल की पृष्ठभूमि और शुरुआती संघर्ष
फरीदाबाद के रहने वाले मनीष नरवाल का दाहिना हाथ जन्म से ही कार्यहीन था। पहली कक्षा में ही उन्होंने महसूस किया कि वे अन्य बच्चों से अलग हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास टूट गया और सार्वजनिक स्थानों से डरने लगे। बचपन में वे फुटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते थे, परंतु शारीरिक बाधाओं के कारण वह सपना अधूरा रह गया। उनके पिता, दिलबाग सिंह, ने उनके सपनों को साकार करने के लिए बल्लभगढ़ की शूटिंग एकेडमी में प्रवेश करवाया। पिस्टल खरीदने के लिए पिता को रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर दबाव आया।
कोचिंग और प्रगति
शुरुआत में मनीष को शूटिंग में कोई रुचि नहीं थी, परंतु कोच प्रकाश नौटियाल की निरंतर प्रेरणा और मार्गदर्शन ने उन्हें धीरे‑धीरे इस खेल में निपुण बना दिया। कोच की मदद से उन्होंने तकनीकी कौशल और मानसिक दृढ़ता विकसित की, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बन सके।
एशियन पैरा गेम्स 2026 में उपलब्धियां
नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में मनीष नरवाल ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 इवेंट में 233.7 अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान सुरक्षित किया। इस सिल्वर मेडल के साथ उन्होंने दक्षिण कोरिया के जो जियोंगदू को गोल्ड और चीन के यांग चाओ को ब्रॉन्ज से पीछे छोड़ दिया। यह जीत उनके 2023 हंगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में प्राप्त सिल्वर मेडल के बाद का दूसरा अंतरराष्ट्रीय पदक है, जिससे उनका रंग बदल गया।
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अन्य भारतीय पैरा एथलीटों की सफलताएँ
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत ने अन्य खेलों में भी मेडल जीते। पावरलिफ्टिंग में अशोक ने 65 किलोग्राम वर्ग में 192 किलोग्राम उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया, जबकि अंतिम सेट में 201 किलोग्राम का प्रयास विफल रहा। भाला फेंक (जेवलिन) में प्रदीप कुमार ने F54 कैटेगरी में 27.45 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर सिल्वर मेडल जीता, और आयुष वर्मा ने F53 कैटेगरी में 17.88 मीटर थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त किया।
मुख्य बातें
- मनीष नरवाल ने 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 में 233.7 अंक कर सिल्वर मेडल जीता।
- यह जीत लॉस एंजिल्स 2028 पैरालंपिक्स का कोटा भी सुनिश्चित करती है।
- पिता ने पिस्टल खरीदने के लिए रिश्तेदारों से कर्ज लिया, जिससे परिवार की आर्थिक कठिनाइयाँ उजागर हुईं।
- कोच प्रकाश नौटियाल की मार्गदर्शन ने मनीष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया।
- भारत ने पावरलिफ्टिंग, भाला फेंक और अन्य इवेंट्स में भी मेडल हासिल किए।
आगे का रास्ता और लक्ष्य
सिल्वर मेडल जीतने के बाद मनीष नरवाल ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य पैरालंपिक में गोल्ड जीतना है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी तकनीक को और निखारने और मानसिक दृढ़ता को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण करेंगे। कोच प्रकाश नौटियाल ने कहा कि मनीष की मेहनत और समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया है, और आगे भी वह भारतीय पैरा शूटरों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
मनीष की कहानी यह दर्शाती है कि कठिनाइयों के बावजूद दृढ़ संकल्प और परिवार के समर्थन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनका सफर न केवल खेल जगत में बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।




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